सहारनपुर विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल जातीय आधार पर मतदाताओं को रिझाने में जुट गए हैं। निर्णायक भूमिका निभाने वाले दलित और मुस्लिमों के अलावा सियासी दलों ने गुर्जर, राजपूत, सैनी और वैश्य प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
सहारनपुर में प्रत्येक विधानसभा में ओबीसी और अनुसूचित जातियां चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। ऐसे में ओबीसी और अनुसूचित जाति में शामिल कई वर्ग ऐसे हैं जिसे अपने पाले में करने के लिए राजनीतिक दलों को ऐडी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि इन जातियों को राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। मगर, चुनावों में इनकी भूमिका निर्णायक मानी जा सकती है।
जिले की सात विधानसभा सीटों पर दलित और मुस्लिम अपनी अच्छी खासी संख्या के चलते राजनीतिक दलों की निगाहों में रहते हैं। इसके बाद ओबीसी में शामिल गुर्जर और सैनी राजनीतिक पार्टियों की पसंद बनते हैं।
सामान्य में वैश्य, पंजाबी के अलावा राजपूतों को भी राजनीतिक तवज्जों मिलती है। मगर, दलितों में शामिल वाल्मीकि, खटिक और धोबी सहित अन्य जातियां हर विधानसभा क्षेत्र में जीत- हार का आधार बदल सकते हैं।
ऐसे ही ओबीसी में कश्यप, जाट, कांबोज, कोली, धीमान, पाल, रोहिला सहित कई ऐसी जातियां हैं जो किसी भी परिणाम में उलटफेर कर सकते हैं। ऐसे में राजनीति दलों के लिए इन जातियों केे अपने पक्ष में करना बेहद टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
इन्हें रिझाने के लिए अब सियासी दल इनके नेताओं के जरिये मैदान में उतरने की फिराक में हैं। मगर, माना जा रहा है कि इन जातियों का मत इस चुनाव में निर्णायक होगा।