सहारनपुर। जिले में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) संगठन को लगातार लग रहे झटकों के बीच अब पार्टी नए सामाजिक समीकरण साधने में जुट गई है। जिलाध्यक्ष शाहजमां खान के इस्तीफे के बाद संगठन में नए चेहरे को लेकर मंथन तेज हो गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार रालोद गुर्जर या सैनी समाज से किसी नेता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
दरअसल, सहारनपुर जिले में जाट मतदाताओं की संख्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कम मानी जाती है, जबकि गुर्जर और सैनी समाज का प्रभाव कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत है। यही वजह है कि पार्टी अब नए जातीय समीकरणों के जरिए संगठन को मजबूत करने की रणनीति बना रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से भी इन दोनों बिरादरियों से जुड़े लोगों के नाम मांगे गए हैं। शाहजमां खान के इस्तीफे से पहले भी रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष राव कैसर भी पार्टी छोड़ चुके हैं। इसके अलावा कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी हाल के महीनों में संगठन से दूरी बना चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने जिले में पार्टी संगठन की स्थिति को कमजोर किया है। ऐसे में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को संगठन के लिए अहम माना जा रहा है।
पार्टी के अंदरखाने में चर्चा है कि रालोद इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहती है, जो संगठन को संभालने के साथ-साथ विभिन्न समाजों के बीच राजनीतिक संतुलन भी बना सके। ऐसे में गुर्जर और सैनी समाज के नेताओं को भी मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि रालोद गुर्जर या सैनी समाज पर दांव खेलती है तो इसका असर आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल जिले में संभावित नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।