देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली दंगों को लेकर दायर पुलिस की चार्जशीट को एकतरफा, भेदभावपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना की आड़ में नफरत की राजनीति की जा रही है। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जमीयत सभी कानूनी तरीके अपनाएगी।
शनिवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सत्ता का नाजायज फायदा उठाकर कुछ लोग निर्दोष लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करके सांप्रदायिकता के एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रयास में लगे हैं। मौलाना मदनी ने सीएए के खिलाफ अभियान चलाने वालों की अंधाधुंध गिरफ्तारियों और दिल्ली दंगों में एकतरफा कार्रवाई पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लॉकडाउन में भी विशेषकर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपने गुप्त एजेंडे को पूरा करने के लिए राजनेताओं की ओर से पुलिस का प्रयोग किया जा रहा है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि पूर्व नौकरशाह हर्ष मंदर जैसे मानवाधिकार के कार्यकर्ता और शाहीन बाग में लंगर लगाकर खाना बांटने वाले एक मानवतावादी सिख डीएस बिंद्रा को भी पुलिस ने मुल्जिम बनाया है। मौलाना मदनी ने कहा कि दिल्ली दंगे में जिन 53 लोगों की मौत हुई थी उनमें मुसलमानों की संख्या 38 बताई जा रही है।
पुलिस ने उनमें से कुछ लोगों के मामले में जांच की है और बाकी लोगों की हत्या की जिम्मेदारी अज्ञात दंगाइयों के सिर डाल दी। मौलाना मदनी ने पुलिस की एकतरफा चार्जशीट पर कहा कि इस चार्जशीट में पुलिस ने यह बताना गवारा नहीं किया कि उसने तीन दिनों तक जारी रहने वाले इन दंगों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए और घटनास्थल से कितने दंगाइयों को हिरासत में लिया गया था। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सभी मुकदमों की पैरवी के लिए दिल्ली सरकार ने जिन वकीलों को नियुक्त किया वे सभी सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि यह तीनों वकील पीड़ितों की क्या पैरवी करेंगे।