सीएचसी परिसर में स्थित रेशम विकास विभाग का कार्यालय
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छुटमलपुर। फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड-19 अस्पताल बनने के बाद से क्षेत्र के रोगियों को भटकना पड़ रहा है। ओपीडी और इमरजेंसी सहित सभी सुविधाएं बंद होने के चलते गंभीर रुप से घायल होने वालो को भी सहारनपुर या देहरादून जाना पड़ रहा है।
तीस मार्च को फतेहपुर सीएचसी परिसर में कोविड-19 लेवल वन अस्पताल बनाया गया था। इसे उच्चीकृत कर लेवल टू कर दिया गया था। कोविड अस्पताल बनने के बाद से ही यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं बंद कर दी गई थी। फतेहपुर सीएचसी के रिकार्ड के अनुसार औसतन यहां बाहय रोगी विभाग में साढे़ तीन सौ रोगी रोज उपचार पाते थे। प्रत्येक माह के डेढ़ सौ के करीब प्रसव भी होते थे। ये सब रोगी तो भटक ही रहे हैं सबसे ज्यादा दिक्कत सड़क हादसों के शिकार घायलों को हो रही है। देहारादून हाईवे पर स्थित होने के चलते यहां दुर्घटना के घायल सबसे ज्यादा पहुंचते हैं। वैसे भी छुटमलपुर और देहरादून के 45 किमी की दूरी के बीच कोई ऐसा अस्पताल नहीं है, जहां घायल को प्राथमिक उपचार भी मिल सके। ऐसा नहीं कि अस्पताल में ओपीडी या इमरजेंसी न चलाई जा सकती हो। यहां परिसर में बनी अस्पताल की इमारत में रेशम विभाग का कार्यालय स्थापित है। यदि इस कार्यालय को यहां से स्थानांतरित करा दिया जाए तो इस इमारत में आसानी से ओपीडी चलाई जा सकती है। क्षेत्रीय लोगों गन्ना समिति टोडरपुर के पूर्व चेयरमैन ठा जसबीर सिंह, व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश राणा, भाकियू तोमर के मंडल प्रभारी अजय पुंडीर, सत्यपाल सिंह सैनी, हाजी सलीम अहमद आदि ने अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवा बहाल करने की मांग की है।
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यदि रेशम विकास विभाग को दी गई इमारत अस्पताल को मिलती है तो इसमें आसानी से ओपीडी और इमरजेंसी चलाई जा सकती है।
डा नवदीप गुप्ता सीएचसी इंचार्ज