सहारनपुर में प्रदूषण की वजह से फैल रही बीमारियों की चपेट में सहारनपुर का एक और गांव आ चुका है। नागल से सटे पनियाली कासिमपुर में चार साल में तीस से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। यहां 25 से ज्यादा लोग हेपिटाइटस सी की चपेट में हैं।
इतना ही नहीं, ग्रामीणों में फैल रही बीमारियों से दहशत है। मगर, प्रशासन गांव में फैल रही गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे हुए है। तीन दिन पहले गांव के लोगों ने डीएम से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की थी। अब तक गांव में चिकित्सकों की टीम तक नहीं पहुंची।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते न जाने कितने लोगों को असमय मौत का ग्रास बनना पड़ता है। जिसका उदाहरण क्षेत्र के गांव पनियाली कासिमपुर में देखने को मिल रहा है।
पिछले चार वर्षों से लीवर व गले की बीमारी ने लगभग तीस लोगों को मौत का शिकार होना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से 15 लोगों की मौत पिछले एक वर्ष में हुई है।
प्रशासन के उदासीन रवैये को देखते हुए करीब एक माह पूर्व ग्राम प्रधान ने एक जांच शिविर का आयोजन कराया था। जिसमें करीब तीन सौ लोगों की जांच की गई थी और 25 लोग हैपेटाइटिस सी के रोगी पाए गए।
जबकि गांव की जनसंख्या लगभग छह हजार की है। यदि पूरे गांव के लोगों की जांच हुई होती तो यह संख्या सैकड़ों में पहुंच जाती। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पेयजल के चलते यह बीमारी फैल रही है।
मौत का शिकार हुए लोग
गांव निवासी यशवंत सिंह, रामजीलाल सैनी, वेद प्रकाश, सोनू, नीटू, नैपाल सिंह, विरेंद्र सिंह, धनपाल सिंह, सतीश, धर्मपाल, राजाराम, महिपाल, धर्मपाल सुनार, पवन, जयपाल, यशपाल सिंह, रणजोर, वेदपाल, सावित्री, हरनाम, हसीना, महावीर भोला, रणबीर भोला, गुरबत सिंह, कर्णसिंह गलिया, बलेश्वर लंगूड़, बलवीर, झभर पहलवान, मूर्ति, बलेश्वर जमादार आदि अकाल मौत का शिकार हुए।
बीमारी से जूझ रहे लोग
निर्मल सिंह, अमर जीत कौर, जसविंदर कौर, शमशेर सिंह, अनिल, टीटू, बाल्ली, सुेरशपाल, मांगेराम, मदनपाल, ममता प्रथम, ममता द्वितीय, राजकुमार, रविन्द्र, राहुल, अशोक, मीरा आदि।