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खुरपका और मुंहपका रोग से पशु पालकों में दहशत

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पशु पालक आदेश त्यागी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जिले में फैल रहे खुरपका और मुंहपका रोग से एक तरफ जहां पशुओं की मौत हो रही है, वहीं पशु पालकों में दहशत बनी है। एक माह में 60 से अधिक दुुधारू पशुओं की मौत हो गई, जबकि एक हजार से रोग से ज्यादा रोग से पीड़ित हैं। पशु पालकों का आरोप है कि समय से वैक्सीनेशन न होने की वजह से रोग फैल रहा है। इसी तरह जिले भर में पशु पालकों को करीब 65 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है।
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सरसावा क्षेत्र में खुरपका और मुंहपका रोग प्रकोप अत्यधिक है। इस क्षेत्र में सैकड़ों पशु बीमारी की चपेट में है। पशुओं खुर और मुंह पक गए हैं, जिनमें मवाद निकल रही है। पशुपालक व सभासद अनुज कांबोज ने बताया कि रोग की चपेट में उनके 20 दुधारू पशु हैं। उन्हें पशु की अत्यधिक देखभाल कर खुद ही इलाज करना पड़ रहा है। मोहल्ला हजारा निवासी बबलू, मोबीन, सुशील, गौरव, राजकुमार, ओम प्रकाश उनके पशु भी खुरपका व मुंहपका रोग से ग्रसित हैं। आरोप लगाया कि समय पर वैक्सीनेशन न होने की वजह पशु बीमारी की चपेट में आ गए। इसी क्षेत्र के गांव कुतुबपुर में भाजपा देहात मंडल के अध्यक्ष अमरीश राणा के चार दुधारू पशुओं की मौत हो चुकी है। बड़गांव क्षेत्र गांव महेशपुर में एक दर्जन पशुओं की मौत हुई हुई थी। इसी तरह जिले भर में 60 से अधिक पशुओं की जान गई।
कर्जदार हो रहे पशुपालक, इन जगहों पर भी मरे पशु
देवबंद क्षेत्र के गांव खटौली में 15 से अधिक पशुओं की जान जा चुकी है। वर्तमान में 200 से अधिक पशु बीमारी की चपेट में है। पशु पालक आदेश त्यागी का कहना है कि डेयरी कारोबार में पहले ही घाटा सौदा साबित हो रहा है। अब खुरपका और मुंहपका रोग ने पशु पालकों की कमर तोड़ दी है। पशुपालक में संजय त्यागी, राजेश त्यागी, कुलदीप शर्मा, अनित त्यागी, परविंदर, संदीप, कृष्ण दत्त, अनिल त्यागी ने बताया कि पशुओं की मौत की वजह से कई लोग कर्जदार भी हो चुके हैं। महंगे पशु होने की वजह से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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उठाना पड़ रहा भारी नुकसान
गांव महेशपुर में कई पशुओं की मौत हो चुकी है। बीते दिनों साहब सिंह की एक भैंस, जसकुमार की एक भैंस, लीलू की एक भैंस सहित 15 पशुओं की मौत हुई है। पशु पालकों का कहना है कि एक भैंस कीमत एक लाख रुपये से अधिक है। लगातार हो पशुओं की मौत से क्षेत्र के पशु पालकों को 20 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। इसी तरह साढ़ौली कदीम में बिजेंद्र सिंह सिंह के दो, कृपाल सिंह की एक गाय, बिरमपाल के दो और राजेश की एक गाय की मौत हो चुकी है।
रोग के लक्षण
-- पशु के मुंह से से अत्यधिक लार का टपकना
-- जीभ और तलवे पर छालों का उभरना एवं जीभ का बाहर आ जाना
-- पशु के जुगाली करना बंद कर देना
-- दूध उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत की कमी
-- पशुओं का गर्भपात होना
-- बछड़ों में अत्यधिक बुखार आने पर मृत्यु हो जाना।
ऐसे करें बचाव
-- रोग का पता लगने पर पशु को अन्य पशुओं से तुरंत दूर किया जाए
-- दूध निकालने वाले व्यक्ति को हाथ और मुंह साबुन से धोना चाहिए
-- प्रभावित क्षेत्र को सोडियम कार्बोनेट घोल पानी मिलाकर धोना चाहिए
-- चिकित्सकों की सलाह लेकर पशु के तुरंत टीका लगवाने के साथ नियमित उपचार कराएं।
-- स्वस्थ एवं बीमार पशु को अलग-अलग रखें
-- बीमार पशुओं को स्पर्श करने के बाद व्यक्ति को सोडियम कार्बोनेट घोल से अपने हाथ पैर धोने चाहिए।
-- जिस जगह पर पशु को रखते हों, वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें।
-- टीकाकरण के दौरान प्रत्येक पशु के लिए अलग-अलग सुई का प्रयोग कराया जाए।
-- पशु के ठीक हो जाने पर 20 दिन बाद ही उसे दूसरे पशुओं के पास लाना चाहिए।
एक लाख का हुआ टीकाकरण
जिले में 7.46 लाख दुधारू पशु है। इन दिनों वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। एक लाख से अधिक पशुओं का टीका लग चुका है। 45 दिन में सभी पशुओं का वैक्सीन लगा दी जाएगी। खुरपका और मुंहपका रोग से पीड़ित पशुओं का भी इलाज विभाग की ओर से कराया जा रहा है।--------राजीव सक्सेना, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

पशुपालक बिजेंद्र सिंह- फोटो : SAHARANPUR

पशुपालक साहब सिंह- फोटो : SAHARANPUR

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