सहारनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच जिला योजना के तहत जनपद में होने वाले विकास कार्य सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
अब तो अधिकतर विभागों के अधिकारी भी मान रहे हैं कि जिला योजना अब चुनावी भंवर में फंस सकती है और इसके अधिकतर काम अब होने ही मुश्किल हैं। सबसे बड़ी समस्या तो सड़कों की है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बों तक की बदहाल सड़कों को दुरुस्त करने से लेकर निर्माण तक का अधिकतर काम जिला योजना से ही कराने की तैयारियां की जा रही थीं।
जनपद में इस वित्तीय वर्ष के लिए करीब 350 करोड़ की जिला योजना के कार्य किए जाने हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिला योजना में अब तक महज 90 करोड़ की धनराशि ही हासिल हो पाई है। इसमें 65 करोड़ के आसपास का खर्च किया गया है।
सड़क, बिजली, पानी स्वास्थ्य और शिक्षा सुधार से जुड़े कार्य न होने के कारण कुछ लोगों ने भी विभागों में शिकायतें भेजना भी शुरू कर दी हैं। पंचायती चुनाव के चक्कर में भी हर विभाग पर अधूरे कार्यों को लेकर शिकायतों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।
चुनावी चक्कर में इतना पैसा तो इसमें बजट क्यों नहीं
बसपा विधायक रवींद्र कुमार मोल्हू कहते हैं कि एक तरफ तो सपा सरकार चुनावी चक्कर में पूरे सूबे में पानी की तरह पैसा बहाने का ढिंढौरा पीट रही है तो दूसरी तरफ हर साल पारित होने वाली जिला योजना के बजट में भी लाले पड़े हुए हैं। सड़कों के गड्ढों के कारण हादसे हो रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। ट्रामा सेंटर तक में विशेषज्ञ नहीं हैं। हादसों की शिकार जिंदगियां दम तोड़ रही हैं।
चुनावी शोर ज्यादा, काम बहुत कम
रालोद जिलाध्यक्ष अय्यूब हसन कहते हैं कि चुनावी शोर तो बहुत ज्यादा हो रहा है। काम कहीं नजर नहीं आ रहा है। जिला योजना ही नहीं अन्य सरकारी कार्यक्रमों के हालात भी ऐसे ही हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के कारण अब आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में एक या दो महीने में बजट आ भी गया तो काम कहां से हो जाएंगे।
जितना बजट मिला, उतना खर्च कराया : सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी मोनिका रानी ने कहा कि जिला योजना में शासन से अब तक जितना बजट मिला है। वह लगभग खर्च किया गया है। उम्मीद है कि सरकार बाकी बजट भी जल्द जारी करेगी ताकि चुनावी चक्कर में आगे काम अधिक प्रभावित न हों।