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सरकारी केंद्रों पर लक्ष्य से चार गुणा अधिक धान की खरीद

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सरकारी केंद्रों पर लक्ष्य से चार गुणा अधिक धान की खरीद
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सहारनपुर। कोरोना काल में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद ने रिकार्ड बना दिया है। लक्ष्य 2000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 8486 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। यह लक्ष्य से चार गुना अधिक है। अभी 31 जनवरी तक खरीद जारी रहेगी, जिससे खरीद का यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। बीते वर्ष 2030 मीट्रिक टन ही धान की खरीद हुई थी। पूर्व के कई वर्षों में इतनी धान खरीद नहीं हुई।
सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए सामान्य प्रजाति के धान की खरीद करती है। जिले में 24 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। गत वर्ष जिले में जहां केवल 496 किसानों ने केंद्र पर धान बेचा था, जबकि इस बार अब तक 2561 किसान धान बिक्री कर चुके हैं।
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89 फीसदी हो चुका है भुगतान
सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक 15.85 करोड रुपये का धान खरीदा गया है। जबकि भुगतान 14.07 करोड रुपये का कर दिया गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि खरीद एजेंसियों के पास धनराशि की कोई कमी नहीं है। अब तक 89 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। शेष राशि को किसानों के खाते में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
- बोले आढ़ती
बाजार में सामान्य प्रजाति के चावल की मांग कम होने से इस बार इसके रेट कम चल रहे हैं। डिमांड कम होने का बड़ा कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं को बेहद कम दर पर चावल दिया जा रहा है। इससे बाजार में मांग में कमी आई है। मंडी में सामान्य प्रजाति का धान रेट 1400 से 1525 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
- मदन मोहन मित्तल, आढती।
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बाजार में मांग कम होने से धान का भाव कम चल रहा है। इस समय सामान्य प्रजाति के धान का रेट 1400 से 1500 रुपये के बीच है। जबकि एमएसपी अधिक है। इसलिए किसान अच्छी क्वालिटी के धान को तो सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच रहे हैं। कमजोर गुणवत्ता वाले धान को मंडी में लेकर जा रहे हैं।
-- राजकुमार बंसल, आढती।
----- वर्जन --
अभी तक लक्ष्य का चार गुना से अधिक खरीद हो चुकी है। लक्ष्य 2000 मीट्रिक टन का है जबकि खरीद 8486 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। इस बार अधिक संख्या में किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचा।
-- प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
- इसलिए हुई बंपर धान खरीद
सरकार ने सामान्य प्रजाति के धान का एमएलसी 1868 रुपये और ग्रेड-1 के धान का मूल्य 1888 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। बाजार में आढ़त पर इसी धान की कीमत 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक कम है। सरकारी केंद्रों पर धान खरीद बढ़ने का यह अहम कारण है।
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-हर साल बड़ी मात्रा में धान हरियाणा जाता था। कोरोना काल में किसानों ने हरियाणा ना जाकर स्थानीय क्रय केंद्रों पर ही धान बेचने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। यह भी सरकारी केंद्रों पर धान खरीद बढ़ने का एक कारण है।
-------- धान का रकबा
जनपद में धान का कुल रकबा ------- 60 हजार हेक्टेयर
मोटा एवं सामान्य धान का रकबा --- 12 हजार हेक्टेयर
बासमती धान का क्षेत्रफल ---------- 48 हजार हेक्टेयर
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