सहारनपुर में गन्ने में लगा पोक्का बोईंग रोग
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सहारनपुर। जिले में गन्ने की फसल पर पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इस रोग से प्रभावित फसल की बढ़वार रुक जाती है। फफूंद जनित यह रोग गन्ने के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव डालता है। इसका सर्वाधिक प्रकोप गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति पर देखने को मिल रहा है। जिले भर से रोजाना कई किसान इस रोग के उपचार की सलाह के लिए केवीके में आ रहे हैं।
जिले में बडे़ पैमाने पर गन्ने की खेती होती है। इसमें भी सबसे अधिक क्षेत्रफल गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति का है। इस प्रजाति में पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि पोक्का बोईंग रोग प्रारंभिक अवस्था में गन्ने अगोले में पत्ती के निचले हिस्से में जो तने से जुडे़ रहती है, वहां हल्के पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। जो बाद में भूरे रंग के हो जाते हैं। रोग से प्रभावित पत्तियां सड़कर गिर जाती हैं। यदि मौसम में नमी है तो अगोला की सारी पत्तियां आपस में मुड़कर उलझ जाती हैं। फ्यूजेरियम मॉनिलीफोरमी फफूंद से होने वाला यह रोग हवा, वर्षा और मृदा के द्वारा फैलता है। इस रोग के लिए अनुकूल मौसम 20 से 30 डिग्री तापमान और वातावरण में 70 से 80 प्रतिशत नमी होना है। उन्होंने बताया कि जिले के कई गांवों के किसान इस रोग के उपचार की जानकारी के लिए केवीके में आ रहे हैं।
ऐसे करें उपचार
केवीके के प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि इस रोग से प्रभावित फसल के अवशेष खेत में नहीं रहने चाहिए। जैसे ही इसके प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें, तभी कॉपर ऑक्सीक्लोराइड फफूंदीनाशी का दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। छिड़काव गन्ने के ऊपरी भाग पर होना चाहिए। एक एकड़ फसल के लिए करीब 250 लीटर दवा के घोल की आवश्यकता होगी। यह छिड़काव एक पखवाडे़ के अंतर पर दो बार करना फायदेमंद रहता है।