सहारनपुर। बुजुर्गों के बेहतर इलाज के लिए एसबीडी जिला अस्पताल में बना जिरियाट्रिक केयर वार्ड (वृद्धावस्था देखभाल वार्ड) गोदाम बनकर रह गया है। वार्ड पर ताला लटका है, जबकि कागजों में यह वार्ड बना हुआ है। हालत यह है कि जहां एक वार्ड में संक्रमित बीमारियों से पीड़ित मरीज रहते हैं, उनमें ही बुजुर्गों को भर्ती किया जा रहा। ऐसे में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्ष 2017-18 में एसबीडी जिला अस्पताल में 10 बेड का जिरियाट्रिक वार्ड बनाया गया था। इसमें 60 साल से अधिक उम्र के मरीजों की देखभाल की जानी है। बच्चा वार्ड के पास और लाउंड्री के बराबर में जिरियाट्रिक वार्ड बना है। शुरुआत में बुजुर्ग मरीज भर्ती किए गए। उसके बाद वर्ष 2019 में कोविड आने से वार्ड को आइसाेलेशन में परिवर्तित कर दिया था।
जिरियाट्रिक वार्ड में भर्ती होने वाले बुजुर्ग मरीजों के इलाज के लिए दो विशेषज्ञ डॉक्टर, दो फार्मासिस्ट, छह नर्स, दो अटेंडेंट, फिजियोथेरेपिस्ट काउंसलर व अन्य स्टाफ की तैनाती की जानी थी, यह अब तक नहीं हुई है। जिरियाट्रिक वार्ड के सामान का कोई अता-पता नहीं है। इस समय यह वार्ड ऑक्सीजन गैस सिलिंडर, बाल्टियां के साथ अन्य चिकित्सीय उपकरण रखने के काम आ रहा है। वार्ड गवाही दे रहा है कि धरातल पर कुछ नहीं है। सवाल यह है कि जब बड़े-बड़े वादे किए गए तो उन्हें पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है। बुजुर्गों को इलाज कराने के लिए कतार में लगना पड़ रहा।
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अस्पताल में बच्चा वार्ड के पास जिरियाट्रिक वार्ड बना है। अगर वार्ड में सामान भरा है तो उसे दिखवाया जाएगा। बुजुर्गों को बेहतर इलाज कराना प्राथमिकता में है।
- डॉ. सुधा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल में जिरियाट्रिक वार्ड बना है। इस वार्ड के लिए शासन से स्टाफ की तैनाती होनी है। अभी तक स्टाफ नहीं मिला है। जैसे ही स्टाफ आएगा उसे इस वार्ड में तैनात कर दिया जाएगा।
- डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी