सहारनपुर। कोरोना कर्फ्यू ने जमीन की खरीद फरोख्त पर ग्रहण लगा दिया है। एक मई से 12 मई तक तहसील सदर के तीनों उप निबंधक कार्यालयों में एक भी बैनामा नहीं हुआ है। जबकि इन तीनों कार्यालयों में 150 से 200 बैनामे प्रतिदिन होते थे। इससे न सिर्फ प्रदेश सरकार का राजस्व प्रभावित हो रहा है बल्कि बैनामा लेखकों, स्टांप विक्रेताओं से लेकर अन्य पर भी इसका विपरीत असर पड़ा है।
कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों की प्राथमिकता जमीन जायदाद खरीदने की बजाए अपने जीवन को सुरक्षित रखने की है। यहीं कारण है कि कोरोना कर्फ्यू के बाद से 12 मई तक तहसील सदर के उप निबंधक कार्यालय प्रथम, द्वितीय और तृृतीय में एक भी बैनामा नहीं हुआ है। इससे पहले उप निबंधक कार्यालयों में बैनामा कराने से लेकर अन्य कार्यों को लेकर आने वाले लोगों की भीड़ लगी रहती थी। भीड़ को देखते हुए महानिरीक्षक निबंधन डॉक्टर रोशन जैकब ने 22 अप्रैल को बैनामा कराने के लिए पहले एपाइंटमेंट लेने की व्यवस्था की थी। इसके तहत संपत्ति की खरीद फरोख्त करने वालों को निबंधन कार्यालय से एपाइंटमेंट लेना होता था। इसमें भी एक दिन में एक उपनिबंधक कार्यालय में अधिक से अधिक 30 बैनामे करने की सीमा निर्धारित की गई थी। इसके अलावा बीस हजार रुपये से अधिक की धनराशि के भुगतान को ऑनलाइन करने पर जोर दिया गया था। सहायक महानिरीक्षक निबंधन संजय श्रीवास्तव ने बताया कि एक मई से 12 मई तक तहसील सदर के तीनों उप निबंधक कार्यालयों में एक भी बैनामा नहीं हुआ है। जबकि कोरोना गाइडलाइन की अनुसार कार्यालय खुल रहे हैं।
अन्य विभागों का भी यही हाल
कोरोना कर्फ्यू की वजह से उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की आमदनी भी धड़ाम हो गई है। बसों को पहले ही निर्धारित क्षमता से चलाया जा रहा है, लेकिन उतने भी यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण रोडवेज की आमदनी भी आधी रह गई है। इसके अलावा वाणिज्य कर विभाग और अन्य विभागों की राजस्व प्राप्ति पर भी प्रभाव पड़ा है।