सहारनपुर। मकान मालिक और किरायेदारों के बीच कई मुकदमे अदालतों में विचाराधीन हैं। जिले भर में ऐसे मुकदमों की संख्या दो हजार से ज्यादा है। अब आदर्श किरायेदारी अधिनियम के तहत हर जिले में प्राधिकरण का गठन होगा। इस कदम को अधिवक्ता और अन्य लोग अच्छा बता रहे हैं। क्योंकि इससे अदालतों से मुकदमों का बोझ भी कम होगा और किराएदार एवं मकान मलिकों के बीच चल रहे विवादों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार शर्मा का कहना है कि प्राधिकरण बनने से एक ओर जहां मकान मलिक और किरायेदार के मध्य लंबे समय से चल रहे विवादों का जल्द निपटारा हो सकेगा, वहीं इससे अदालतों में मुकदमों का बोझ भी कम होगा। महत्वपूर्ण यह भी है कि दोनों ही पक्ष अपनी अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे।
अधिवक्ता अमित कुमार चौधरी का कहना है कि हर जिले में प्राधिकरण बनने से वकीलों की आजीविका जरूर प्रभावित होगी, क्योंकि कोर्ट के समय में अधिवक्ताओं को बाहर जाने की दिक्कत होगी। क्योंकि सारा काम प्राधिकरण के अंतर्गत चला जाएगा और प्राधिकरण कोर्ट परिसर से बाहर स्थापित होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश अग्रवाल का कहना है कि 1986 में कानून में संशोधन हुआ था, तब जिनका किराया 2000 रुपये से ज्यादा था, उन पर रेंट कंट्रोल एक्ट लागू नहीं होगा, उससे मुकदमों की संख्या में गिरावट आई थी। अब जो मसौदा तैयार किया गया है, उससे भी काफी राहत मिलेगी। क्योंकि किराएदार और मकान मालिक के बीच मकान के निर्माण में बदलाव को लेकर ज्यादातर विवाद होते हैं।