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अब गणित और विज्ञान विषयों को प्रैक्टिकल करके समझेंगे विद्यार्थी

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सहारनपुर। परिषदीय और एडेड प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में गणित और विज्ञान की शिक्षा का पैटर्न बदलने जा रहा है। अब विज्ञान और गणित की पढ़ाई केवल थ्योरी यानी किताबों पर आधारित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थी प्रैक्टिकल के जरिए विषयों को समझ सकेंगे। इसके लिए नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विद्यालय के लिए गणित और विज्ञान की किट भेजी गई हैं। जिनमें प्रैक्टिकल संबंधी सामान हैं।
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जनपद में 1,438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जबकि 28 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय एडेड हैं। इसके अलावा 11 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, भोजन, जूते और मोजे और किताबें सरकार की ओर से नि:शुल्क दी जाती हैं, लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत अब विद्यालयों के लिए विज्ञान और गणित की किट भी भेजी जा रही है। सरकार की मंशा है कि विद्यार्थी गणित और विज्ञान विषयों को केवल किताबों के जरिए न जानें, बल्कि प्रैक्टिकल कर उनके सूत्रों को समझें। जनपद में गणित और विज्ञान की किटें पहुंच चुकी हैं, जो एनसीईआरटी द्वारा भेजी गई हैं। पेपर बॉक्स के भीतर पॉलिथीन में एक प्लास्टिक का मजबूत बॉक्स जो देखने में ब्रीफकेस की तरह है बंद है। इसी बॉक्स के भीतर विज्ञान और गणित के प्रैक्टिकल संबंधी सामान बंद हैं। उक्त किट स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखवा दी गई है। जिनको विद्यालयों में भेजा जाएगा। विज्ञान किट की कीमत आठ हजार और गणित किट की कीमत 19 हजार रुपये बताई जा रही है।
गणित की 3113 और विज्ञान की 269 किट आईं
जनपद में अभी तक जूनियर हाईस्कूलों के लिए 573 गणित किट आई हैं, जबकि प्राथमिक विद्यालयों के लिए 2540 किट भेजी गई हैं। अधिकारी ने बताया है कि प्राथमिक विद्यालयों में गणित की दो-दो किट जाएंगी, जबकि जूनियर हाईस्कूल में एक-एक किट जाएगी। इसके अलावा विज्ञान की 269 किट आई हैं, जबकि शेष आना बाकी हैं। विज्ञान की किट केवल जूनियर हाईस्कूल में जाएगी।
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ट्रेनिंग और दिशा निर्देश मिला बाकी
किट के वितरण और प्रयोग को लेकर अभी शासन से स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं आए हैं। अभी केवल किट भेजी गई है। ऐसे में विभाग दिशा निर्देशों के इंतजार में है। इसके अलावा विज्ञान और गणित के शिक्षकों को किट के इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिसके लिए मास्टर ट्रेनर की व्यवस्था की जाएगी।
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ऐसे करेंगे विज्ञान और गणित किट का प्रयोग
-प्रयोग के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासा और अवधारणा को दूर किया जाए, जिससे उनमें गहरी समझ बन सके।
-विज्ञान के शिक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि किट के उपकरणों से विद्यार्थी अच्छे से परिचित हों और उनका प्रयोग करना सीख सकें।
- शिक्षकों की देखरेख में ही विद्यार्थियों द्वारा किट का इस्तेमाल किया जाए।
- प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल में एक अतिरिक्त कक्ष को विज्ञान लैब व कस्तूरबा विद्यालयों में गणित एक्टिविटी कार्नर के रूप में विकसित किया जाए।
- विज्ञान कक्ष में विज्ञान से संबंधित चार्ट पेपर, पोस्टर, सामान्य ज्ञान, वैज्ञानिकों का नाम, उनके आविष्कार आदि दीवारों पर चस्पा करें।
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गणित और विज्ञान की पढ़ाई के लिए किट आई है और कुछ आना बाकी है। अब विज्ञान और गणित की पढ़ाई केवल किताबों से नहीं होगी, बल्कि प्रैक्टिकल करके विद्यार्थी विषयों को समझेंगे। यह सरकार का बड़ा कदम है, जिससे विज्ञान और गणित को लेकर विद्यार्थियों की समझ बढ़ेगी।
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अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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