अब किसानों ने 21 बीघा गेहूं की फसल पर चलाया ट्रैक्टर
बेहट। तीनों कृषि कानून के विरोध में अब ढाबा माजरी गांव के पांच किसानों ने अपनी 21 बीघा भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। उधर, गागलहेड़ी के नन्हेड़ा गांव में फसल का उचित दाम नहीं मिलने से नाराज किसान ने गोभी की खड़ी जोत दी। साथ ही कर्ज में डूबे किसान ने आत्मदाह की चेतावनी दी है।
बुधवार को तहसील के गांव कुतुबपुर भूकड़ी गांव के किसान राजकुमार ने बकाया गन्ना भुगतान नहीं मिलने और कृषि कानूनों के विरोध में तीन बीघा गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया था। वहीं, बृहस्पतिवार को ढाबा माजरी गांव के किसानों ने भी अपनी 21 बीघा गेहूं की फसल जुताई कर दी। किसान संजय ने 5 बीघा, अनिल ने 7 बीघा व आदित्य, संजय पुत्र दिलेराम तथा तीन-तीन बीघा जमीन में खड़ी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर से नष्ट की है। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों और कृषि कानूनों से किसान बर्बादी के कगार पर है। नलकूपों पर विद्युत मीटर लगा दिए गए, गन्ना मूल्य भुगतान समय से नहीं हुआ, धान की फसल औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।
उधर, गागलहेड़ी के नन्हेड़ा वेद बेगमपुर गांव में बृहस्पतिवार सुबह आफताब पुत्र शकूर ने सात बीघा गोभी की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। आफताब ने बताया कि समिति व बैंक का कर्ज लगभग 10 लाख रुपए हो चुका है। गोभी की फसल बेचकर ब्याज चुकाने की उम्मीद थी लेकिन उचित दाम नहंी मिलने से परेशान होकर यह कदम उठाया। उसके नलकूप के बिजली का बिल भी ज्यादा हो गया है। फसलों के दाम ऐसे ही रहे तो वह आत्मदाह करेगा। इस दौरान वहां से गुजर रहे भाकियू नेता जिले सिंह ने आफताब को समझाया कि वह अपनी फसल नष्ट ना करे, लेकिन किसान ने एक नहीं सुनी और ट्रैक्टर चलाकर फसल को नष्ट कर दिया।
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कुतुबपुर भूकड़ी के किसान का मिल पर नहीं है बकाया
बेहट। कुतुबपुर भूकड़ी के किसान राजकुमार द्वारा गेहूं की फसल नष्ट करने के मामले में गन्ना विभाग एक प्रेस नोट जारी किया है। सहकारी गन्ना विकास समिति बेहट की तरफ से जारी प्रेस नोट में जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि संबंधित किसान ने फसल पर ट्रैक्टर चलाने की एक वजह बकाया गन्ना भुगतान भी बताया था, जबकि उसके द्वारा 2019-20 में बजाज चीनी मिल गांगनौली को कुल 106.32 क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की गई थी, जिसका संपूर्ण भुगतान 33641 रुपये 21 फरवरी को उसके खाते में पहुंच चुका है। किसान द्वारा गन्ना मूल्य न मिलने का आरोप निराधार है।