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अब संगठन से ऊपर उठकर एकजुट नजर आए किसान

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अलग अलग बैनर के तले शिकायतें कर रहे किसानों में कृषि विधेयक को लेकर गुस्सा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बकाया गन्ना भुगतान कराने, विद्युत दरें, धान खरीद केंद्र आदि मुद्दे किसानों को परेशान करते हैं। इसके बाद भी किसान अलग अलग संगठनों में बंटा था। अलग अलग बैनर के तले शिकायतें कर रहे किसानों में कृषि विधेयक को लेकर एकसाथ गुस्सा है। कृषि विधेयकों ने किसान संगठनों में भी जान फूंक दी है। अब संगठन से ऊपर उठकर किसान एकजुट नजर आए हैं। इसकी गवाही चक्का जाम आंदोलन भी देता है, इसमें सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि अन्य भी किसान संगठनों ने अपनी भागीदारी निभाई।
जाहिर है कृषि विधेयकों के विरोध ने तमाम किसान संगठनों में नजदीकी ला दी है। भारतीय किसान यूनियन के शुक्रवार को चक्का जाम को कई किसान संगठनों ने सक्रिय सहयोग दिया। केवल भारतीय किसान संघ की ही इससे अलग राय है। हालांकि भारतीय किसान संघ भी कृषि विधेयक में कांट्रेक्ट फार्मिंग में पैसा सीधे किसान के खाते में भेजने पर जोर दे रहा है। उनका मानना है कि मात्र दो फीसदी किसान ही इन विधेयकों के विरोध में हैं।
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विधेयक में एमएसपी दिलाने की गारंटी नहीं - चौधरी विनय कुमार
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी विनय कुमार का कहना है कि कृषि विधेयकों को लेकर लगभग सभी किसान संगठन एकजुट हैं। चक्का जाम को भी कई संगठनों ने सक्रिय सहयोग दिया। कृषि विधेयक में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की गारंटी होनी चाहिए। फसल का न्यूनतम समर्थन नहीं देने को अपराध की श्रेणी में रखते हुए संबंधित व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान भी शामिल किया जाए।
अनदेखी में लाए विधेयक से आहत है किसान - नीरज चौधरी
भाकियू (अखंड) की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज चौधरी का कहना है कि यदि कृषि विधेयक में फसल का एमएसपी दिलाने का ठोस प्रावधान हो तो किसानों को इससे कोई आपत्ति नहीं रहेगी। कृषि विधेयकों का प्रारूप बनाते समय सरकार को किसान संगठनों को भी विश्वास में लेना चाहिए था। किसानों को सरकार की नीयत सही नहीं दिख रही है।
किसान एकजुट हुआ है, आंदोलन भी जारी रहेगा - अजब सिंह
भारतीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष ठाकुर अजब सिंह का कहना है कि कृषि विधेयकों के वापस होने तक संगठन का आंदोलन जारी रहेगा। शुक्रवार को तो केवल चक्का जाम किया था, लेकिन आंदोलन तो जारी रहेगा। सभी किसान संगठनों का उद्देश्य ही एक है, इसलिए मुद्दों के आधार पर एकजुटता भी है।
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मात्र दो फीसदी किसान ही विरोधी -- श्यामवीर त्यागी
भारतीय किसान संघ के प्रांतीय संयोजक श्यामवीर त्यागी अन्य किसान संगठनों से अलग राय रखते हैं। उनका मानना है कि कई किसान संगठन राजनीतिक दलों के पिछलग्गू बने हुए हैं। अपनी आपत्तियों पर किसान संगठनों को सरकार के साथ बैठकर वार्ता करनी चाहिए। उनका मानना है कि मात्र दो फीसदी किसान ही इसके विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग में फसल का दाम सीधे किसान के खाते में आए। न कि पहले किसान से ऋण वसूला जाए।
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