देवबंद। कलक्ट्रेट स्थित मस्जिद को लेकर अदालत के फैसले के बाद देवबंद क्षेत्र के 11 मदरसों और मस्जिदों का मामला भी फिर चर्चा में आ गया। कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने देवबंद तहसील में 11 मामलों में से छह में मस्जिद एवं मजार को नोटिस दिए थे।
आरोप था कि यह सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाई गई है। साथ ही अन्य पांच में मामला विचाराधीन है। छह अवैध निर्माण को हटाने के लिए जिला प्रशासन ने 15 दिन का समय दिया था, जिन मदरसे और मस्जिदों को नोटिस दिए गए थे उनमें अक्सा मस्जिद ग्राम सोहनचिडा, मदीना मस्जिद ग्राम पंडोली, मदरसा दारुस्सलाम ग्राम छलौली, मदरसा मुतवल्ली मुर्तजा ग्राम अंबेहटा शेखा, मस्जिद के मुतवल्ली ग्राम पहाड़पुर, मस्जिद मुतवल्ली ग्राम अंबेहटा शेखा शामिल है। नोटिसों पर जवाब दाखिल करने की अंतिम तिथि प्रबंधकों के अनुरोध पर 13 जुलाई से बढ़ाकर 20 जुलाई कर दी गई है। उलमा का कहना है कि कार्रवाई को लेकर समुदाय में असहजता है। कचहरी मस्जिद के मामले में उन्होंने न्यायालय से आदेश पर पुनर्विचार की अपेक्षा जताई है।
यह बोले धर्म गुरु
- जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक एवं वरिष्ठ आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि सहारनपुर जनपद में लंबे समय से ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं। किसी मस्जिद को हटाने का आदेश आने से लोगों में सवाल पैदा हुए हैं। इस तरह की कार्रवाई से सौतेला बर्ताव जैसा महसूस हो रहा है। यदि किसी पक्ष को न्यायालय के आदेश पर आपत्ति है तो उसका समाधान भी कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में ही तलाशा जाना चाहिए। संविधान सभी नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए न्यायिक उपाय अपनाने की अनुमति देता है। इस प्रकार की कार्रवाई से समुदाय में असहजता का माहौल बना है।
- मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि संबंधित मस्जिद काफी पुरानी है, इसलिए मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के बाद न्यायालय को पुनर्विचार करना चाहिए। धार्मिक स्थलों को विवाद का विषय बनाने के बजाए समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने की जरूरत है। अंग्रेजों और बादशाहों के दौर में अनेक सार्वजनिक स्थानों पर दूर-दराज से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए धार्मिक स्थल स्थापित किए जाते थे। कहा कि देश की तरक्की आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता से ही संभव है। इसलिए सभी पक्षों को शांति और कानून के दायरे में रहकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।