सहारनपुर। विषयों को पूर्णकालिक और अंशकालिक कैटेगरी में रखने के नियम से कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत 15 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं की संविदा पर खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल छह शिक्षिकाओं को ही नोटिस भेजा गया है, जिन्हें पूर्णकालिक से अंशकालिक में समायोजित किया जाना है, जबकि नियम के अनुसार कई शिक्षक-शिक्षिकाएं ऐसे हैं, जिनकी संविदा समाप्त हो सकती है। क्योंकि पूर्णकालिक में शिक्षक नहीं रहेंगे और सहायक विषयों वाली शिक्षिका भी पूर्णकालिक नहीं रहेंगी। हालांकि इन्हें हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद है, क्योंकि मामले से संबंधित याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
दरअसल, समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक की तरफ से जुलाई 2020 में शिक्षिकाओं और शिक्षकों की संविदा को लेकर आदेश जारी हुआ। उसमें अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान को मुख्य विषय के रूप में पूर्णकालिक कैटेगरी में रखा गया, जबकि कंप्यूटर, शारीरिक शिक्षा, कला एवं क्राफ्ट और गृह विज्ञान को गौण (सहायक) विषय मानते हुए अंशकालिक कैटेगरी में रखा गया।
इसके बाद जिले में कार्यरत प्रीति सिंह, पम्पी सिंह, रंजीता पाल, मंजू श्रीवास्तव, पूजा यादव और विशेश्वरी को पूर्णकालिक से अंशकालिक में समायोजन के लिए पत्र भेजा। इन्हें 18 दिसंबर तक अपना सहमति पत्र बीएसए कार्यालय में जमा कराना है। इन शिक्षिकाओं ने अपना विरोध भी जताया है।
छह साल सेवा की है, समझ नहीं आ रहा अब क्या करें
प्रतापगढ़ की रहने वाली मंजू श्रीवास्तव 2014 से सहारनपुर के रेलवे कॉलोनी खलासी लाइन स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में कार्यरत हैं। वह कहती हैं कि अब तक 22 हजार रुपये वेतन मिला, मगर अंशकालिक बनाकर हमारा वेतन 9800 रुपये किया जा रहा है, इससे परिवार का पालन कैसे होगा, इतने समय की सेवा का ऐसा फल मिलेगा, सोचा नहीं था। सरकार को हमारे बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पूर्व के शासनादेशों का होना चाहिए पालन
सीतापुर की रहने वाली प्रीति सिंह 2012 से देवबंद के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में तैनात हैं। पूर्व में परियोजना निदेशक ने ही आदेश में कहा था कि नया नियम नई संविदा वालों पर लागू होगा, पूर्व में भर्ती हुए शिक्षक शिक्षिकाओं पर नहीं। अब विषय के अनुसार पूर्णकालिक और अंशकालिक का फार्मूूला लागू कर दिया। हमारी और हमारे परिवार की चिंता तक नहीं की गई।
नवीनीकरण को लेकर भी उलझन
जिन शिक्षिकाओं को समायोजन या नवीनीकरण के संबंध में पत्र नहीं मिला, वह भी पशोपेश में हैं। क्योंकि इनमें कई शिक्षिकाएं ऐसी हैं तो सहायक (गौण) विषय को पढ़ाने वाली हैं। इनमें नकुड़ स्थित विद्यालय की वार्डन/ प्रधानाचार्या आशा रंजन भी शामिल हैं, वह कंप्यूटर विषय पढ़ाती हैं, लेकिन नए नियमों में ग्रेजुएशन में कंप्यूटर विषय की अनिवार्यता वाला पेंच फंस गया है। इसके अलावा जिले में छह शिक्षक हैं, जो पूर्णकालिक विषय पढ़ाते हैं। नियम कहता है पूर्णकालिक सिर्फ शिक्षिकाएं ही रखी जा सकेंगी, ऐसे में इन शिक्षकों की संविदा पर भी खतरा है। आशा रंजन कहती हैं कि हाईकोर्ट में भी याचिका डाली हुई हैं, यदि हाईकोर्ट से आदेश मिल गया तो ठीक है नहीं तो कई की संविदा चली जाने का खतरा है।
जिले में विद्यालयों की स्थिति
कुल विद्यालय --- 09
छात्राओं की संख्या -- 900
शिक्षक- शिक्षिकाएं -- 74
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शासन से जो गाइडलाइन प्राप्त हुई है, उसी का पालन कराया जाएगा। जो मानकों को पूर्ण नहीं करते हैं, उनकी संविदा समाप्त हो जाएगी। -- प्रणय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी