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साइंस स्ट्रीम के विद्यालय में ही विज्ञान के शिक्षक नहीं

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सहारनपुर। शिक्षकों की भर्ती के बाद भी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा दूर नहीं हो सका है। इसका बेहतर उदाहरण जनपद के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सबसे पुराना नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज है। साइंस स्ट्रीम का विद्यालय होने के बावजूद यहां विज्ञान विषय के ही शिक्षक नहीं हैं। पीटीए के तहत न्यूनतम मानदेय पर रखे गए शिक्षकों के सहारे शिक्षा व्यवस्था चल रही है।
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विद्यालय में एलटी ग्रेड के शिक्षकों के 22 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र आठ ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 12 पद खाली पड़े हैं। यह पद कई साल से ऐसे ही खाली हैं। कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं की बात करें तो आठ पद के सापेक्ष मात्र दो स्थायी प्रवक्ता तैनात हैं, जबकि शेष पदों पर पीटीए के तहत मानदेय पर शिक्षकों को रखा गया है। चूंकि शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में मौजूदा शिक्षकों पर कार्य का बोझ रहता है। वह निर्धारित कक्षाओं से अधिक कक्षाएं ले रहे हैं, जिससे बच्चों का पढ़ाई का नुकसान न हो, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि यह स्थायी समाधान नहीं है। मौजूदा शिक्षकों के अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्मिता सिंह शिक्षिका सीसीएल पर होने के बावजूद घर से ऑनलाइन कक्षाएं ले रही हैं।
इन विषयों में नहीं हैं स्थायी शिक्षक
राजकीय इंटर कॉलेज में गणित, जीव विज्ञान, फिजिक्स और हिंदी में एक-एक पद खाली है। बायोलॉजी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, गणित और रसायन विज्ञान विषय के लिए अस्थायी शिक्षक रखे गए हैं, जो गणित, जीव विज्ञान और फिजिक्स भी पढ़ाते हैं, जिससे छात्रों का नुकसान न हो।
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56 विद्यालयों में से केवल एक में प्रधानाचार्य
जिले में कुल 56 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 15 इंटर कॉलेज, 40 हाईस्कूल और एक अभिनव विद्यालय शामिल है, जो सीबीएसई से संबद्ध है। कुल 56 विद्यालयों में नौ विद्यालय बालिकाओं के हैं, जबकि शेष में को-एजुकेशन है। खास बात यह है कि 56 राजकीय विद्यालयों में से मात्र नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य है। शेष 55 विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाचार्य जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
प्रदेश भर के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की कमी है। यहां भी ऐसा है, मगर विभाग ने पीटीए के तहत शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है, जिससे शिक्षा प्रभावित न हो। शासन को पत्र लिखकर शिक्षकों की मांग की गई है।
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रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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