मुजफ्फराबाद ब्लाॅक के इस गांव में वर्ष 2007 में राजकीय इंटर काॅलेज स्वीकृत हुआ था। पांच साल बाद वर्ष 2012 में इमारत के निर्माण के लिए 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इसके दो साल बाद फरवरी 2014 में निर्माण कार्य शुरू कर वर्ष 2018 में बंद कर दिया था।
निर्माण लागत बढ़ने से स्वीकृत बजट कम पड़ने का हवाला देकर इमारत में दरवाजों, रास्ते, चहारदीवारी और फिनिशिंग का काम नहीं हो सका। इसके चलते इमारत शिक्षा विभाग को हैंडओवर नहीं की जा सकी।
इन पांच सालों में देखरेख के अभाव में इमारत के अंदर ऊंची घास और बड़े पेड़ उग आए। दीवारों पर काई की परतें और खिड़कियों पर जंगली बेल चढ़ गई है। लिंटर की सफाई न होने से उस पर इकट्ठा हुए कूड़े में जमा पानी लगातार उसे कमजोर बना रहा है। इमारत के कुछ कमरों में फिलहाल गोशाला का भूसा भरा है।
कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस द्वारा लगाया गया बोर्ड भी जर्जर हो गया है, जिस पर कार्य समाप्त होने की तिथि दिसंबर 2018 लिखी है। ग्राम प्रधान सतीश कुमार, ऋषिपाल उपाध्याय, मदन सैनी, नर सिंह, लाल सिंह, केहर सिंह, धीरज कुमार, ऋषिपाल सैनी, गुलेशर अंसारी आदि ग्रामीणों ने इमारत का कार्य पूरा कर आगामी सत्र से इंटर काॅलेज में कक्षाओं का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
डीएम की नाराजगी से भी नहीं चेते जिम्मेदार
गांव के पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल राणा का कहना है कि सात सितंबर को डीएम के दौरे के बाद भी कार्यदायी संस्था ने इमारत की सफाई नहीं कराई है, जबकि उस वक्त डीएम यहां खड़े झाड़ झंखाड़ और पेड़ों को देखकर काफी नाराज हुए थे। उन्होंने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर तक कराने की चेतावनी दी थी।
गांव के विवेक उपाध्याय कहते हैं कि गांव में राजकीय इंटर काॅलेज स्वीकृत होने से इंटर तक की शिक्षा घर के पास मिलने की आस जगी थी, लेकिन 16 साल की लंबी अवधि के बाद भी इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। इमारत देखरेख के अभाव में बदहाल हो रही है।
काॅलेज के लिए वर्ष 2012 में 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जबकि अब 11 साल बाद रिवाइज बजट बढ़कर 2.19 करोड़ रुपये हो गया है। जिलाधिकारी द्वारा फंड स्वीकृत करने की कार्रवाई चल रही है। पैसा मिलने पर जल्द ही निर्माण कार्य पूरा करा इंटर काॅलेज की इमारत को शिक्षा विभाग के हैंडओवर कर दिया जाएगा। - भरत लाल गोंड, नोडल अधिकारी/ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी