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एंड्रॉयड फोन नहीं है, कैसे करें ऑनलाइन पढ़ाई

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सहारनपुर। ज्यादातर विद्यार्थियों के पास एंड्रायड फोन नहीं होने के चलते माध्यमिक विद्यालयों की ऑनलाइन पढ़ाई खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ऐसे में शिक्षकों के सामने भी बच्चों को पढ़ाने में समस्या आ रही है।
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माध्यमिक विद्यालयों पर विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने का आदेश मिला है। मगर ज्यादातर विद्यार्थियों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं होने से ऑनलाइन पढ़ाई कराना मुमकिन नहीं है। एसएएम इंटर कॉलेज के भूगोल के प्रवक्ता ब्रिजेश पुंडीर ने बताया कि कक्षा छह से आठ तक के 50 से 60 फीसदी बच्चों के अभिभावकों के पास एंडॉयड फोन नहीं है। जिनके पास है वह भी उसका इस्तेमाल खुद ही करते हैं। ऐसे में 80 से 90 फीसदी अभिभावकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कक्षा 11 और 12वीं के 20 से 25 फीसदी बच्चों के पास एंड्रॉयड फोन है।
फोन एक बच्चे अनेक
कई घरों में यह भी समस्या आई है कि एंड्रॉयड फोन तो एक है, मगर पढ़ाई करने वाले बच्चों की संख्या तीन से चार है। ऐसे घरों में एक फोन का इस्तेमाल भी कर पाना और डाटा का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है।
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प्रधानाचार्यों की बात
- जनता इंटर कॉलेज बेहट के प्रधानाचार्य ललित धीमान ने बताया कि ज्यादातर विद्यार्थियों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं है। डाटा और नेटवर्क की भी समस्या है।
- एएच इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य भूप सिंह ने बताया कि अप्रैल माह में उनके विद्यालय के 500 बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे थे, जिनकी संख्या घटकर अब सौ रह गई है।
- पब्लिक इंटर कॉलेज साढ़ौली कदीम के प्रधानाचार्य अजय कुमार शर्मा का कहना है कि ज्यादातर बच्चे गरीब घरों के हैं, जिनके पास एंड्रॉयड फोन नहीं है।
- जेजे इंटर कॉलेज चिलकाना के प्रधानाचार्य सत्यवीर सिंह ने बताया कि उनके विद्यालय के 15 से 20 फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई करने में सक्षम हैं।
- सीएस दयानंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश शर्मा ने बताया कि माता-पिता के पढ़ा लिखा नहीं होने से छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई में परेशानी है।
- गोचर कृषि इंटर कॉलेज रामपुर मनिहारान के प्रधानाचार्य ओमपाल सिंह का कहना है कि 75 से 80 फीसदी बच्चों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं है।
- डीसी जैन इंटर कॉलेज सरसावा के प्रधानाचार्य दिनेश गुप्ता ने बताया कि कुल 700 में से 300 बच्चों के अभिभावक के ही पास एंड्रॉयड फोन है। ऑनलाइन पढ़ाई मुश्किल है।
बोले शिक्षक नेता
प्रगतिशील शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रजनीश चौहान ने ऑनलाइन पढ़ाई को खानापूर्ति करार दिया है। उनका कहना है कि इससे मुश्किल से दस फीसदी ही बच्चे लाभान्वित होंगे 90 फीसदी वंचित रह जाएंगे, जो किसी भी तरह से ठीक नहीं है। सरकार को कोई और विकल्प तलाशना होगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चेतनारायण गुट) के संगठन मंत्री राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि शासन के आदेश पर ऑनलाइन पढ़ाई कराई तो जा रही है मगर यह सफल नहीं है। क्योंकि ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे हैं, जिनके पास एंड्रॉयड फोन नहीं है।
शासन के आदेश हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाए। विद्यालयों ने इसे शुरू भी किया है। यह भी जानकारी मिली है कि कई विद्यार्थियों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं है। ऐसे अभिभावकों से अपील है कि वह बच्चे के हित में एंड्रॉयड फोन की व्यवस्था करें।
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डॉ. अरुण कुमार दूबे, डीआईओएस।
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