सहारनपुर। श्री बालाजी घाट पर रह रहे नितिन पंत ने कोतवाली मंडी के एक उपनिरीक्षक पर सहारनपुर व आश्रम छोड़कर जाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। मामले में एसएसपी से कार्रवाई और सुरक्षा देने की मांग की है। मुजफ्फरनगर के फुलत मदरसे के संचालक मौलाना कलीम के मामले में नितिन पंत एटीएस का गवाह है।
मूलरूप से उत्तराखंड के नैनीताल के तल्लीताल निवासी नितिन पंत करीब आठ माह से बाबा लालदास बाड़ा के निकट स्थित श्री बालाजी घाट के आश्रम में रह रहा है। मंगलवार को एसएसपी को दिए पत्र में नितिन पंत ने कहा कि 2010 में राजस्थान के मेवात में उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अली हसन बना दिया गया था। उसे मुजफ्फरनगर के गांव फुलत में एक मदरसे में रखा गया था, जहां पर उसे हिंदू समाज की लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने का दबाव बनाया जाता था। मौलाना कलीम ने भी उससे मुलाकात की थी। इसके बाद उसे नागल और रामपुर मनिहारान क्षेत्र में स्थित मदरसे में रखा गया था। किसी प्रकार वह आरोपियों के चंगुल से छुटकर हिंदू संगठनों के पाधिकारियों के पास पहुंचा था, जिन्होंने उसकी हिंदू धर्म में वापसी कराई। धर्मांतरण के मामले में मौलाना कलीम की गिरफ्तारी होने पर नितिन ने भी एसएसपी को तहरीर देकर उसकी ओर से भी रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद एटीएस लखनऊ ने मौलाना कलीम के मामले में नितिन पंत को गवाह बनाया था।
मंगलवार को एसएसपी को दिए पत्र में नितिन पंत ने आरोप लगाया कि कोतवाली मंडी का एक उपनिरीक्षक उस पर आश्रम और सहारनपुर छोड़ने का दबाव बना रहा है। उसके गुरु को भी उपनिरीक्षक कह रहा है कि नितिन को हरिद्वार भेज दिया जाए। नितिन ने एसएसपी से सुरक्षा दिए जाने और दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एसएसपी आकाश तोमर का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।