सहारनपुर। शासन ने पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को आसानी से रजिस्टर्ड कराने के लिए नए नियम लागू किए, लेकिन संपत्ति रजिस्टर्ड कराने वाले नए नियमों के फेर में ऐसे उलझे की मात्र तीन माह में तीन संपत्ति ही इसके तहत पंजीकृत हो सकी।
दरअसल, नए नियम के तहत तीन पीढ़ी की पैतृक अचल संपत्ति को रजिस्टर्ड कराया जा सकता है। यह छूट केवल उन विभाजन विलेखों पर ही उपलब्ध है, जिसमें पैतृक संपत्ति का विभाजन संपत्तियों के सहस्वामियों के बीच होगा। साथ ही पक्षकारों के बीच में तीन पीढ़ियों का शामिल होना जरूरी है। नए नियमों के तहत संपत्ति में बेटे का अंश पहले से निर्धारित होना जरूरी है। इन नियमों के चलते योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसके चलते तीन माह बाद भी मात्र देवबंद में दो और नकुड़ में एक संपत्ति पंजीकृत हुई है। इससे इतर लोग दानपत्र का सहारा ले रहे हैं।
नए आदेशों के तहत पांच हजार रुपये का स्टांप शुल्क और पांच हजार रुपये का पंजीकरण शुल्क लगता है। पुराने नियम के तहत पांच फीसदी स्टांप शुल्क के साथ संपत्ति के मूल्य का एक फीसदी पंजीकरण शुल्क जमा करना होता था। नए प्रावधान संपत्ति को इस मद के तहत रजिस्टर्ड कराने में आड़े आ रहे हैं। यह छूट केवल कृषि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों के बंटवारे में लागू है। फर्म, सोसायटी, ट्रस्ट व कंपनी के मामले में यह नियम लागू नहीं होगा।
- यह देने होते हैं साक्ष्य
पारिवारिक बंटवारे को रजिस्टर्ड कराने के लिए पक्षकारों को डीड प्रस्तुत करते समय एक से अधिक साक्ष्य देने होंगे। इसके लिए स्टांप एवं निबंधन विभाग ने विकल्प भी दिए हैं। इन विकल्पों के तहत सक्षम न्यायालय की ओर से निर्गत उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र, खतौनी, सक्षम प्राधिकारी की ओर से निर्गत पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र, नगरीय निकायों के नामांतरण संबंधी अभिलेख, परिवार रजिस्टर, उत्तर प्रदेश फैमिली आईडी, सरकारी सेवकों के लिए सर्विस बुक आदि विकल्प रहेंगे।
- वर्जन
पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा रजिस्टर्ड कराने में लोग कम रूचि ले रहे हैं। दानपत्र के बजाए नए नियमों में संपत्ति जल्दी और कम राशि में पंजीकृत हो जाती है। सभी उपनिबंधक कार्यालयों में संपत्ति को पंजीकृत कराया जा सकता है।
- बृजेश सिंह, एआईजी स्टांप