सहारनपुर। जिला पंचायत की तरफ से राज्य वित्त आयोग के तहत खड़ंजा और सीसी रोड निर्माण में बड़ा घालमेल सामने आया है। जिले में एक करोड़ रुपये से ज्यादा के करीब 18 निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया तो हुई, मगर कार्यादेश जारी नहीं हुआ और ना ही अनुबंध। बावजूद इसके निर्माण कार्य पूर्ण हो गए और वह भी गुणवत्ता से नहीं। जिला पंचायत की अपर मुख्याधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण के बाद शासन को आख्या भेजी तो, अपर मुख्य सचिव ने आदेश जारी कर दिया है कि राज्य वित्त आयोग से इन कार्यों का भुगतान नहीं किया जाएगा।
दरअसल, जिला पंचायत सहारनपुर ने राज्य वित्त आयोग से होने वाले 451 कार्यों का टेंडर 29 मई 2020 को निकाला था और 16 जून को टेंडर खुले थे। जिला पंचायत की अपर मुख्याधिकारी डॉ. सुमनलता ने 16 और 17 जुलाई को स्थलीय निरीक्षण किया, जिसमें पता चला कि 18 कार्य ऐसे हैं, जिनका टेंडर खुलने के बाद कार्यादेश जारी नहीं किया गया था और अनुबंध भी नहीं हुआ था। वह 18 कार्य भी पूर्ण करा दिए गए और मौके पर उनकी गुणवत्ता भी असंतोषजनक पाई गई। इसके बाद अपर मुख्याधिकारी ने इस संबंध में 20 जुलाई को शासन में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को अपनी आख्या भेजी। उसमें स्पष्ट कहा गया कि बगैर कार्यादेश और अनुबंध के ही निर्माण हुए हैं और गुणवत्ता भी ठीक नहीं है।
इस पर अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष और अपर मुख्याधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि जिन 18 कार्यों का कार्यादेश जारी नहीं था और अनुबंध भी नहीं हुआ था, उनके सापेक्ष राज्य वित्त आयोग की धनराशि से भुगतान नहीं किया जाएगा।
यह होता है अनुबंध
जिस फर्म के नाम टेंडर छूटता है, वह जमानत धनराशि विभाग में जमा कराती है। जो कार्य कराया जाना होता है, उसे संबंधित विभाग के अवर अभियंता की देखरेख में कराने और गुणवत्ता के साथ कार्य कराने का अनुबंध होता है। इसी प्रकार विभाग की तरफ से संबंधित फर्म के नाम कार्यादेश गठित किया जाता है।
10 लाख से नीचे के हैं सभी कार्य
जिन कार्यों के भुगतान पर संकट बना है, उनमें 16 स्थानों पर मिट्टी खड़ंजा निर्माण, जबकि ग्राम मोहनपुर और ग्राम पंडौली में सीसी रोड का निर्माण बताया गया है। सभी 18 कार्यों में किसी की लागत आठ लाख, तो किसी की छह लाख रुपये है। सबसे कम करीब ढाई लाख रुपये की लागत का देवबंद देहात की टीचर्स कालोनी में मिट्टी खड़ंजा निर्माण है।
जिन 18 कार्यों को पूर्ण करा दिया गया, उनके बारे में जिला पंचायत के अभियंता और हमें कोई जानकारी नहीं है। ना ही अनुबंध हुआ और ना कार्यादेश जारी किया गया। स्थलीय निरीक्षण में कार्यों की गुणवत्ता भी असंतोषजनक मिली थी। इस संबंध में शासन को आख्या भेजी थी। उस पर शासन से जो निर्देश मिला है, उसका पालन कराया जाएगा।
-- डाक्टर सुमनलता, अपर मुख्याधिकारी, जिला पंचायत