सहारनपुर। शहर में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए नगर निगम सैनिटाइजेशन, फॉगिंग, चूना, मैलाथियान व ब्लीचिंग पाउडर छिड़कने के नाम पर खूब पैसा बहा रहा है। सफाई के दावे किए जा रहे हैं। हकीकत यह है कि अभियान खास इलाकों तक ही सीमित है। शहर की बाहरी कॉलोनियों और 32 गांवों में सैनिटाइजेशन, फॉगिंग और सफाई के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है।
नगर निगम अधिकारियों के दावों के अनुसार प्रतिदिन 14 वार्डों में सैनिटाइजेशन, फॉगिंग, चूूना, मैलाथियान, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव और सफाई करा रहे हैं। यदि नगर निगम प्रतिदिन 14 वार्डों को कवर कर रहा है तो कुल 70 वार्डों के हिसाब से प्रत्येक वार्ड का नंबर हर पांच दिन में आना चाहिए। मगर ऐसा नहीं है। शहर की बाहरी कॉलोनियों में बीते दो माह में अभी तक एक-एक ही बार सैनिटाइजेशन हुआ है वह भी केवल बाहरी सड़कों पर एक-एक वाहन से। नाजिरपुरा, चकदेवली, हसनपुरा, ज्ञानागढ़, बिशनपुरा आदि इसके बेहतर उदाहरण हैं, जहां निगम के अधिकारी जाकर पड़ताल कर सकते हैं। बाकी कॉलोनियों की भी ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है। उक्त कॉलोनियों में सफाईकर्मी अब भी सप्ताह में एक बार पहुंच रहे हैं, जिसकी वजह से गंदगी के ढेर हैं।
फॉगिंग पर उठ रहे सवाल
फॉगिंग मशीनों से नाम मात्र का धुंआ निकलता है, जो मच्छरों पर असर नहीं कर रहा है। आरोप यह भी है कि मशीन में पूरी दवा नहीं डाली जा रही है। बाहरी कॉलोनियों में अभी तक फॉगिंग भी एक ही बार हुई है उससे भी लोग संतुष्ट नहीं हैं।
संक्रमितों के घर पर भी नहीं
संक्रमितों के घरों को विशेष रूप से सैनिटाइजेशन की जरूरत है। लेकिन यहां पर भी नहीं हो रहा है। निगम के कंट्रोल रूम से प्रतिदिन फोन कर पूछा जाता है कि सैनिटाइजेशन हुआ। कंट्रोल रूम में भी तीन-तीन बार शिकायत दर्ज कराने पर व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
हमारा प्रयास पूरे शहर में बिना किसी भेदभाव के सैनिटाइजेशन, सफाई और फॉगिंग आदि कराना है। इसी लिए रोस्टर बनाया गया है। मॉनिटरिंग के लिए अधिकारी भी नामित हैं। चूंकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी और कई इंस्पेक्टर संक्रमित हैं। ऐसे में कहीं चूक हो सकती है। जांच कराकर संबंधित के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी।
संजीव वालिया, महापौर।