सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा छह से आठ की कक्षाएं चल रही हैं। बीते कुछ दिन में शिक्षकों ने महसूस किया है कि 11 माह के लंबे अंतराल के कारण बच्चे लापरवाह हुए हैं, साथ ही पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी कम हुई है। उनके लिखने की रफ्तार घट गई है। बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्तर को पुराने स्तर पर लाने के लिए शिक्षक अभिभावकों से सहयोग की जरूरत महसूस कर रहे हैं। अमर उजाला ने बच्चों में हुए बदलाव को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों से बात की है। पेश है रिपोर्ट...
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अभिभावकों की बात
- अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना काल में करीब 11 माह तक स्कूल बंद रहने से उनके बच्चे पढ़ाई के प्रति लापरवाह हुए हैं, लेकिन उनकी बेटी ने अपनी रुचि के अनुसार पेंटिंग में हाथ साफ किया है।
-डॉ. रतन सिंह ने बताया कि स्कूल नहीं जाने की वजह से उनके बच्चों में भी पढ़ाई के प्रति रुचि कम हुई है। उनका कहना है कि यह मनुष्य का प्रवृति भी है कि वह बिना डर के काम को समय से और ठीक से नहीं करता है। बच्चों के साथ भी यही हुआ है।
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शिक्षकों की बात
-परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक राजकुमार चौधरी का कहना है कि 11 महीने का अंतराल काफी बड़ा होता है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम हुई है और वह लापरवाह भी हुए हैं। उनको पुराने स्तर पर लाने के लिए शिक्षकों को अभिभावकों के सहयोग की जरूरत है।
-परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक डॉ. अनिल बावरे भी मानते हैं कि बच्चों की लिखने और पढ़ने की आदत में कमी आई है। उनका कहना है कि बच्चों के साथ अभिभावकों को भी मेहनत करनी होगी। उन्हें प्रतिदिन स्कूल भेजना होगा।