सहारनपुर। दशलक्षण कार्यक्रमों के तहत बुधवार को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए पांच-पांच लोगों ने उत्तम शौच धर्म की पूजा की। इसके साथ ही श्रीजी का अभिषेक कर प्रक्षाल पूजन किया गया।
जैन बाग स्थित प्राचीन श्री दिगंबर जैन मंदिर में दीपक कुमार जैन, मनोज कुमार जैन, संजीव कुमार जैन, नवीन कुमार जैन, विपिन कुमार जैन, सतीश चंद जैन, शिव कुमार जैन, सुधीर कुमार जैन, सतीश चंद जैन, पीयूष कुमार जैन, नवनीत कुमार जैन, सौरभ कुमार जैन, सुधीर जैन, निलंक जैन ने पूजा अर्चना की। जैन समाज के लोगों ने कहा कि उत्तम शौच धर्म दशलक्षण महापर्व में चौथा धर्म है। शौच धर्म शब्द शुचि शब्द से बना है, जिसका अर्थ पवित्रता, निर्मलता, स्वच्छता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मानव अपने शरीर की स्वच्छता, पवित्र, निर्मल बनाने के लिए बहुमूल्य सौंदर्य प्रसाधन सामग्री से शृंगार करता है, लेकिन आत्मा की अंतरंग विशुद्धि के लिए कोई पुरुषार्थ नहीं करता। लोभ कषाय की तीव्रता शौच धर्म को उत्पन्न नहीं होने देती। लोभ ही सब पापों का मूल कारण है। लोभ की वजह से मानव झूठ बोलता है, हिंसा करता है और परिग्रह व क्रोध करता है। अगर मानव अपने जीवन से लोभ का त्याग कर दे तो अन्य पाप स्वयं ही आत्मा को मुक्त करके दूर चले जाएंगे। हमें लोभ कषाय छोड़कर अपनी आत्मा को पवित्र, स्वच्छ बनाने की आवश्यकता है। अगर एक बार अपनी आत्मा की स्वच्छता, पवित्रता और शुचिता कर ली तो 84 लाख योनियों में भ्रमण से मुक्ति मिल जाएगी जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने सभी भक्तों से उत्तम शौच धर्म को जीवन में अपने की अपील की। इस दौरान संरक्षक राकेश जैन, महामंत्री संजीव जैन, मीडिया प्रभारी सीए अनिल जैन, उपाध्यक्ष विपिन जैन, चौधरी राजीव जैन, सुनील, सुधीर जैन, नवीन जैन मौजूद रहे।