नासिर के घर सांत्वना देने पहुंचती गांव की महिलाएं।
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मेरठ कैंट इलाके में रविवार दोपहर कोचुवेली-देहरादून एक्सप्रेस में चाकूबाजी में मारे गए नासिर का शव देर रात करीब ढाई बजे यहां जिले के देहात कोतवाली के गांव पीकी में पहुंचा। शव आते ही परिवार के साथ ही पूरे गांव में मातम छा गया। सोमवार दोपहर उसे सुपुर्द ए खाक किया गया।
गमजदा परिवार के लोगों ने बताया कि करीब छह महीने बाद नासिर तीन अप्रैल को दो बहनों की शादियों के लिए रुपये और सामान लेकर केरल से लौट रहा था।
मगर बहनों के हाथों पर मेहंदी रचने से पहले ही पांच बहनों का भाई दुनिया से चल बसा। नासिर की मौत से घर में कोहराम मचा है। माता-पिता, पांच बहनों और भाइयों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह पांच भाइयों में चौथे नंबर का था।
उसकी पांच बहनें हैं। पिता इरशाद मजदूरी कर परिवार का पोषण करते हैं। नासिर पिछले कई साल से अपने दोस्तों के साथ केरल गया हुआ था। वहां वह लकड़ी की कटाई और फर्नीचर का काम करता था।
तीन अप्रैल को ही उसकी दो बहनों शाहनुमा और खुशनुमा तथा भाई साबिर की शादी तय थी। इन शादियों के लिए वह अपनी कमाई के रुपये और कुछ सामान लेकर साथियों अब्दुल वाजिब, शेरू, नदीम, सलमा, राहिल, फुरकान आदि के साथ ट्रेन से घर लौट रहा था।