सहारनपुर। मोहल्ला शाहविलायत निवासी अदीब नैयर की दुकान मुश्किल से 25 वर्ग गज की है, जिसे गृहकर के रूप में 96 हजार रुपये का बिल भेजा गया है। उन्होंने पार्षद के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन समाधान नहीं हो सका है। ऐसे अनगिनत मामले हैं, जिनके भवनों का टैक्स कई गुना तक बढ़ा है और आपत्ति के बाद भी समस्या बनी हुई है।
नगर निगम ने सबसे पहले जीआईएस (ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) सर्वे आधारित 38 हजार व्यावसायिक भवनों के बिल जारी किए थे। बिल कई गुना अधिक होने के चलते व्यापारियों और उद्यमियों को धरना और प्रदर्शन करना पड़ा था। उसके बाद नगर निगम बैकफुट पर आया था और स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू की थी। करीब छह हजार लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरते हुए अपने बिल जमा कराए थे।
इसके बाद 72 हजार आवासीय भवनों को जीआईएस सर्वे आधारित बिल भेजे गए। इन पर भी बिल अधिक होने की आपत्तियां आईं। करीब सात हजार लोगों स्वकर प्रपत्र भरते हुए टैक्स जमा कराया था। आरोप है कि जिन लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर कम टैक्स जमा कराया था। नगर निगम ने उनके टैक्स को सॉफ्टवेयर में अपडेट नहीं किया। अब दोबारा बिल भेजे गए हैं वह फिर से बढ़े हुए गए हैं।