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UP: दिल्ली की आजादपुर मंडी में धूम मचा रहे सहारनपुर के बैंगन, हाथोंहाथ खरीदते हैं व्यापारी, पढ़िए खास रिपोर्ट

Wed, 13 Sep 2023 04:38 PM IST
मेरठ ब्यूरो अशोक कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर

सार

Amar Ujala Special Report : ज्योति कश्यप ने जानखेड़ा में ठेके पर जमीन लेकर बैंगन की खेती शुरू की थी। इसके बूते उनका परिवार आज 92 बीघा जमीन का मालिक है।
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गांव मियानगी में तोडे़ गए बैंंगन की छंटाई करता किसान। संवाद
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विस्तार
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सहारनपुर जनपद में बड़गांव के मियानगी गांव का बैंगन दिल्ली की आजादपुर मंडी में धूम मचा रहा है। वहां यह मियानगी ब्रांड नाम से हाथोंहाथ बिकता है। कभी इस गांव के ज्योति कश्यप ने जानखेड़ा में ठेके पर जमीन लेकर बैंगन की खेती शुरू की थी। इसके बूते उनका परिवार आज 92 बीघा जमीन का मालिक है। उन्होंने साबित कर दिखाया कि बैंगन की खेती से आर्थिक तरक्की की सीढ़ियां कैसे चढ़ी जा सकती है।

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दिल्ली की आजादपुर, गाजीपुर, केशवपुर एवं ओखला मंडी में यहां का बैंगन मशहूर है। ज्योति कश्यप के पुत्र घनश्याम ने करीब 45 वर्ष पहले गांव जानखेड़ा में ठेके पर जमीन लेकर बैंगन की खेती शुरू की थी। उसने अपने बैंगन की सप्लाई दिल्ली में करना शुरू किया। धीरे-धीरे दिल्ली की आजादपुर मंडी में मियानगी गांव का यह बैंगन ब्रांड बन गया। इसकी देखा देखी बड़गांव क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांवों के सैकड़ों किसान गन्ना और गेहूं छोड़ हजारों बीघा भूमि पर बैंगन की खेती कर रहे हैं। ज्योति कश्यप की मौत के बाद उनके तीन बेटे घनश्याम, सतपाल, बलबीर ने भी पिता की विरासत को जिंदा रखा और बैंगन की खेती को आगे बढ़ाया।

ज्योति कश्यप के पौत्र योगेंद्र कश्यप, जय कुमार, दीपक, मोनू का कहना है कि वे सुरखा, नवकिरण व कंचन-75 और हाई ब्रिड बैंगन का बीज लगाते थे, लेकिन सुरखा व नवकिरण में ज्यादा रोग आने लगा था। इसलिए अब वे केवल कंचन-75 प्रजाति का बैंगन ही लगा रहे हैं। दिल्ली की आजादपुर से लेकर ओखला, केशवपुर,गाजीपुर मंडी में कंचन-75 बीज के बैंगन की मांग सबसे ज्यादा रहती है। बताया कि सीजन में हर पांचवें दिन प्रति बीघा भूमि से आठ से दस बैग बैंगन तैयार हो जाता है। बरसात के बाद खेतों में भरे पानी को पैपिंग सेट से निकाल दवाइयों का स्प्रे करते हैं। फिर ट्यूबवेल से पानी लगाते हैं। खाद और दवाई का ध्यान रखते हैं। इससे फसल अच्छी होती है। पूर्व ग्राम प्रधान समय सिंह सैनी कहते हैं कि छोटे किसानों ने गन्ना गेहूं का मोह छोड़ बैंगन की खेती का रुख किया तो खुशहाली उनके दरवाजे पर दस्तक देने लगी।

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व्यापारी हाथों हाथ खरीदते हैं मियानगी का बैंगन
दिल्ली आजादपुर मंड़ी के आढ़ती राशिद ने बताया कि साफ सुंदर होने की वजह से मियानगी गांव का बैंगन आजादपुर मंड़ी का एक ब्रांड बन चुका है, जिसे बड़े व्यापारी मंडी में आते ही खरीद लेते हैं। यहां का बैंगन मंदी के दौर में भी 800 से 1000 रुपये प्रति बैग के हिसाब से बिक रहा है। एक बैग में 30-35 किग्रा बैंगन आता है। मंदी में पांच रुपये किलो और बरसात में यही बैंगन करीब 35 रुपये किलो तक थोक के भाव बिक जाता है।

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