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यमुना नदी की भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर जारी किए खनन परमिट

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बेहट (सहारनपुर)। राजस्व अधिनियम और न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर यमुना नदी की भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर खनन के लिए परमिट जारी किए। इस पूरे मामले में लतीफपुर भूड़ के एक ग्रामीण ने मुख्यमंत्री और प्रशासन के उच्च अधिकारियों से शिकायत की है। आरोप है कि खनन विभाग ने यह परमिट जारी किए है, जबकि राजस्व विभाग ने यमुना की भूमि को संक्रमणीय भूमि धरी होने की रिपोर्ट लगाई है।
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मुख्यमंत्री, खनन निदेशक, मंडलायुक्त व जनपद के प्रशासनिक अधिकारियों को भेजे पत्र में ग्राम लतीफपुर मूल निवासी ब्रह्म पाल सिंह ने कहा खनन विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसी जमीनों के खनन के लिए परमिट जारी कर दिए हैं, जो राजस्व अभिलेखों में यमुना नदी के नाम से दर्ज है। उन्होंने कहा यह जमीन राजस्व विभाग ने कृषि हेतु पट्टे के लिए आवंटित की थी, लेकिन अब खनन विभाग ने इन जमीनों से खनन के लिए परमिट जारी कर दिए हैं, जबकि राजस्व अधिनियम की धारा 132 के तहत इन पर कोई खनन पट्टा नहीं किया जा सकता है।
पत्र में उन्होंने राजस्व विभाग पर भी आरोप लगाए हैं, इसमें कहा यमुना नदी के नाम पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज इन जमीनों को संक्रमण भूमि धरी बताकर रिपोर्ट लगा दी, इसके आधार पर ही खनन विभाग ने खनन परमिट जारी किए। उच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार ऐसी जमीनों से खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। उसने पत्र में बताया ग्राम रसूली आलमगीरपुर आदि गांव में ऐसे परमिट जारी किए हैं। उसने मांग की कि इन परमिटों को निरस्त कर परमिट जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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नदी की भूमि को कृषि भूमि बताकर खनन परमिट जारी करने की शिकायत की जांच की जा रही है। इस संबंध में कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।
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- दीप्ति देव, एसडीएम बेहट।
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