सहारनपुर। कोरोना काल में दवाओं की किल्लत बताकर ज्यादा कीमत वसूली जा रही है और ग्राहकों को पक्के बिल तक नहीं दिए जा रहे हैं। महज 5 प्रतिशत ग्राहकों को ही पक्का बिल दिया जाता है। इसका खुलासा मंगलवार को जिलाधिकारी और एसएसपी द्वारा मेडिकल स्टोरों पर छापा मारने से भी हुआ। छापे के दौरान एक मेडिकल स्टोर संचालक की बिल बुक भी कब्जे में ले ली गई।
मंगलवार को जिलाधिकारी अखिलेश सिंह और एसएसपी डॉ. एस चनप्पा ने ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार को साथ लेकर जिला अस्पताल के आसपास के कई मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। मेडिकल स्टोरों पर ग्राहकों को दवाओं के पक्के बिल नहीं मिले। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। इससे मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया। इस दौरान आस्था मेडिकल स्टोर, सुभाष मेडिकल स्टोर, नीरज मेडिकल स्टोर और डॉ. राजीव गर्ग के यहां जाकर दवाई के बिलों की पड़ताल की गई। दवाओं की उपलब्धता और मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा कोरोना से बचाव के दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं? यह भी देखा गया। एक मेडिकल स्टोर की बिल बुक जब्त की। जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देश दिया कि नियमित रूप से मेडिकल स्टोरों पर जांच कराई जाए और व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।
- किल्लत बताकर वसूलते हैं ज्यादा दाम
अमर उजाला ने 17 मई के अंक में ही दवाओं की कालाबाजारी को लेकर खबर प्रकाशित की थी। क्योंकि कोरोना काल में दवाओं की किल्लत बताकर ज्यादा दाम वसूले जा रहे हैं। जबकि दवाओं के उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और माल वाहक वाहनों की आवाजाही भी जारी है। सिर्फ दवाएं नहीं, बल्कि ऑक्सीमीटर और अन्य उपकरणों के भी दाम दोगुना तक कर दिए गए हैं।
आवश्यक दवाएं, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर नियत दाम पर बिक्री होनी चाहिए। ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दिया जा रहा है, जो गलत है। ग्राहकों से भी अपील है कि दवा खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें। जो भी दवा व्यापारी अधिक दाम पर दवाएं बेचेगा अथवा कालाबाजारी करेगा तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होगी। -- अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी