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मेयर से उलझे व्यापारी, महिलाओं ने की नारेबाजी

Tue, 08 May 2018 11:49 PM IST
ब्यूराो, अमर उजाला/सहारनपुर
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मेयर के आवास पर नारेबाजी करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में पुल खुमरान के पीड़ित व्यापारियों ने मंगलवार को परिवार के साथ महापौर संजीव वालिया के घर पर पहुंचकर हंगामा किया। उन्होंने महापौर का घेराव कर उन्हें खूब खरीखोटी सुनाईं। तीखी नोकझोंक के बीच सरकार और महापौर के खिलाफ नारेबाजी भी की।
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महापौर ने आश्वासन दिया कि वह बोर्ड की बैठक में मामला रखेंगे। साथ ही पुल खुमरान के चौड़ीकरण के बाद जो जगह बचेगी। उसमें दुकानें बनाकर देने का प्रयास किया जाएगा। करीब एक घंटे के घेराव के बाद व्यापारी लौट गए।      
             
पुल खुमरान पर वर्ष 1964 में विवेक जुनेजा, लेखराज, पवन कुमारी, सूरज प्रकाश और वीरेंद्र कुमार को तत्कालीन नगर पालिका परिषद के द्वारा दुकानें अलाट की हुई थी। वर्तमान में पुल खुमरान को चौड़ा करने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत सोमवार को प्रशासन ने पुल खुमरान की उक्त दुकानों को ध्वस्त करा दिया।
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ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान उक्त व्यापारियों ने खूब हंगामा किया था। फोन करने के बावजूद किसी भी भाजपा नेता के मौके पर न पहुंचने पर भाजपा नेताओं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी। कार्रवाई के अगले दिन मंगलवार की सुबह सभी पीड़ित व्यापारी परिवार की महिलाओं और बच्चों समेत महापौर के घर पर पहुंचे और उनका घेराव किया।

इस दौरान व्यापारियों और महापौर के बीच नोकझोंक भी हुई। व्यापारियों ने महापौर से कहा कि आपने दुकानें ध्वस्त नहीं किए जाने का आश्वासन दिया था, तो फिर प्रशासन और नगर निगम ने कैसे दुकानें ध्वस्त कर दी।

बार-बार फोन करने के बावजूद आपने मौके पर जाकर व्यापारियों का हाल तक जानने की कोशिश तक नहीं की। तमाम बहस के बीच व्यापारियों का गुस्सा बढ़ता चला गया और उन्होंने महापौर को खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी।

आरोप लगाया कि भाजपा के नेता केवल हिंदू और मुसलमान कराकर वोट लेना जानते हैं। यह भी कहा कि नगर निगम के अधिकारी महापौर की सुनते नहीं हैं। यही वजह रही कि महापौर कुछ कहते रहे और नगर निगम के अधिकारियों ने कुछ कर दिया। महापौर और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।                    
                  
बिलखते हुए लौटे व्यापारी परिवार                   
महापौर का घेराव करने के बाद तमाम व्यापारी परिवार के संग महापौर के घर के बाहर काफी देर तक खड़े रहे। उनका कहना था कि वह महापौर के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि जिस तरह की बात कही जा रही है, ऐसा होने की संभावना कम ही है। व्यापारियों की नाराजगी महापौर का आश्वासन मिलने के बाद भी कम नहीं हुई, जिसका इजहार उन्होंने बाहर खड़े होकर भी किया। इस दौरान परिवार की महिलाएं और बच्चे बिलखते नजर आए।    
                    
महापौर से पूछा परिवार का पेट कैसे पालेंगे ?                   
घेराव के दौरान व्यापारियों ने महापौर से कहा कि आपने हमारी दुकानें ध्वस्त कराकर हमारे परिवारों को उजाड़ने का काम किया है। दुकानें ध्वस्त होने के बाद हम बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में बताओ कि हम परिवारों के पेट कैसे और कहां से पालेंगे। बच्चों की पढ़ाई और दवा व दूध का खर्च कहां से आएगा? इन सवालों का महापौर के पास कोई जवाब नहीं था और वह नीचे मुंह कर खड़े हो गए।                    
                  
पीड़ित व्यापारियों का गुस्सा वाजिब है, मगर हमारी सरकार और मैं पूरी तरह पीड़ित परिवारों के साथ हूं। जिन व्यापारियों की दुकानें ध्वस्त हुई हैं उनकी बात को नगर निगम बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। कोशिश यही रहेगी कि पीड़ित परिवारों के लिए कोई बेहतर रास्ता निकल सके।                    
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संजीव वालिया, महापौर।  
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