सहारनपुर। वुड कार्विंग की तरह ही बांस के उत्पाद भी जिले की पहचान बन सकते हैं। बांस के उत्पाद बनाने के लिए लोग तैयार हो गए हैं और प्रशिक्षण भी ले रहे हैं, लेकिन बांस की खेती के लिए किसान आगे नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में उत्पाद बनाने के लिए बांस की उपलब्धता समस्या बन सकती है। ऐसे में जरूरत है कि किसानों को बांस की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए।
दरअसल, राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत जिले के बेहट स्थित वन विभाग की नर्सरी में बांस सुविधा केंद्र (सीएफसी) बनाया गया है। यहां पर बांस के उत्पाद बनाने में प्रयोग होने वाली कई मशीनें मध्य प्रदेश के देवास से मंगाई जा चुकी हैं। मार्च माह यहां पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगा था, जिसमें 33 लोगों ने बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को ही एक और प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ, जो 15 दिवसीय रखा गया। इसमें भी 30 से ज्यादा लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उत्पादों की नर्सरी भी लगाई
बृहस्पतिवार को बांस सुविधा केंद्र पर प्रशिक्षण शिविर के समापन पर उत्पादों की नर्सरी भी लगाई गई। उसमें घरेलू उपयोगी उत्पादों में कैंडल स्टैंड, फोटो फ्रेम, टब, ग्लास, कप, कटोरी, खाना रखने के बर्तन, फूलदान आदि दर्शाए गए। इस कार्यक्रम में ब्लाक प्रमुख चौधरी विश्वास मुख्य अतिथि रहे, जबकि पूर्व प्रमुख इनाम, जिला पंचायत सदस्य हंसराज गौतम, डीएफओ ईश्वरचंद सिंह, क्षेत्रीय वनाधिकारी प्रवेश कुमार, कंवरपाल, सुखपाल सिंह, राजेंद्र कुमार, नरेश कुमार आदि मौजूद रहे।
बांस की उपलब्धता बनेगी समस्या
बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण तो शुरू हो गया है, लेकिन उत्पाद बनाने के लिए बांस की जिले में उपलब्धता बड़ी समस्या बन सकता है, क्योंकि अभी तक जिले में बांस की खेती को बढ़ावा नहीं मिल पाया है। बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 15 जिलों में 50 प्रतिशत अनुदान भी मिलता है, लेकिन उसमें सहारनपुर शामिल नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बांस की खेती करने के लिए काफी किसानों से बात हुई, लेकिन वह यह कहते हैं कि बांस की खेती कर लेंगे, लेकिन उसकी खरीद कौन और कब करेगा, इसकी गारंटी मिलनी चाहिए।
इन जिलों में बने है बांस सुविधा केंद्र
मिशन के तहत सहारनपुर, गोरखपुर, झांसी, बरेली, मिर्जापुर के अलावा लखनऊ और सुल्तानपुर में भी सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। हर जिले में उनके उत्पादों की पहचान के लिहाज से प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। झांसी की लाठी, वाराणसी की बांस डलिया, गोरखपुर की सूप डलिया और बरेली व सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग को अहम मानते हुए यहां पर बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दो बार हो चुका है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी प्रशिक्षण पा रही हैं। उम्मीद है कि जिन्होंने प्रशिक्षण लिया है, वह जल्द ही उत्पाद बनाकर बाजार में बिक्री में भी सक्रिय होंगे। इससे जिले की पहचान बांस के उत्पादों को लेकर भी होगी। -- ईश्वरचंद सिंह, जिला वनाधिकारी
- बेहट में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बना बांस सुविधा केंद्र (सीएफसी)- फोटो : SAHARANPUR