सहारनपुर। नगरों के विकास के लिए 15वें वित्त में मिले करोड़ों रुपयों में से 170 करोड़ रुपयों को जनपद के निकाय तय समय तक खर्च नहीं कर सके हैं। परियोजनाएं लटकी हैं और 170 करोड़ रुपया अभी भी निकायों के खातों में पड़ा है। शासन ने दूसरी बार सशर्त 31 मार्च 2027 तक का समय दिया है। 15वां वित्त आयोग एक अप्रैल 2020 को लागू हुआ, जिसकी समाप्ति की सीमा मार्च 2025 थी। इस अंतराल में 15वें वित्त से मिलने वाले धन को नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को विकास कार्यों पर खर्च करना था। लेकिन संबंधित निकायों के जिम्मेदारों की शिथिलता के कारण 15वें वित्त का 170 करोड़ रुपया बैंक खातों में पड़ा है।
शासन पैसा खर्च करने के लिए 31 मार्च 2026 तक समय बढ़ा चुका था, लेकिन उसके बाद भी निकाय इस पैसे को खर्च नहीं कर सके। ऐसे में केंद्र सरकार के स्तर से पोर्टल एक अप्रैल से 22 जुलाई तक बंद रखा गया। 15वें वित्त से मिले धन को खर्च करने और अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए शासन ने दोबारा 31 मार्च 2027 तक का समय दिया है। इसमें कई शर्तें भी रखी गई हैं।
लेटलतीफी बनी कारण : 15वें वित्त से नगर निगम ने अनेक परियोजनाएं तैयार की हैं, जिनमें से कई अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। उनमें दो बड़ी परियोजनाएं स्काडा सिस्टम लगाना और कचरे के लिए दो ट्रांसफर स्टेशन स्थापित करना भी शामिल है।
इन परियोजनाओं पर ही करीब 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च होना है, लेकिन स्काडा के लिए अभी तक टेंडर भी नहीं हो सका है। नगर निगम सहारनपुर ने दिसंबर तक 50 फीसदी खर्च करने का लक्ष्य रखा है। (संवाद)