देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष एवं दारुल उलूम देवबंद के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान की आलोचना की है। उन्होंने इसे सांप्रदायिकता की पराकाष्ठा और सांविधानिक पद की गरिमा के विपरीत बताया। कहा कि मदरसों को आतंकवाद से जोड़ना देश की शैक्षिक परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और संविधान की भावना के खिलाफ है।
मौलाना अरशद मदनी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि जिन लोगों के पूर्वजों ने अंग्रेजी हुकूमत से दया याचिकाएं की थीं, वह आज मदरसों पर आतंकवाद का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह ऐतिहासिक अभिलेखों का हिस्सा है। वहीं, दारुल उलूम देवबंद और उससे जुड़े उलमा ने देश की आजादी के लिए जेल काटी, यातनाएं सहीं और कभी अंग्रेजी शासन के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। मदनी ने कहा कि मदरसों से जुड़े लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और पूर्व छात्रों को आतंकवाद से जोड़ना न केवल निंदनीय है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम और उसके उलमा का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान इतिहास का गौरवशाली अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।