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Saharanpur News: जिंदगी है अनमोल, सिगरेट के कश में न उड़ाएं

Wed, 15 Nov 2023 12:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी तेजी के साथ फैल रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना काफी संख्या में सीओपीडी के मरीज पहुंच रहे हैं। सात महीने में 2349 मरीजों ने चिकित्सकों को दिखाया। चिकित्सकों का मानना है कि एक मीडियम सिगरेट पीने से जिंदगी के 10 मिनट कम होते हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह सिगरेट के कश में जिंदगी को न उड़ाए।
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वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि सीओपीडी का मुख्य कारण धूम्रपान है। एक मीडियम साइज की सिगरेट पीने से जिंदगी के 10 मिनट कम हो जाते हैं। सिगरेट में चार हजार हानिकारक तत्व होते हैं, जिनमें से 599 तत्वों की लत लग जाती है। इसमें मुख्यत: निकोटिन, तार, कार्बन मोनोक्साइड, आरसेनिक और कैडमियम होते हैं। ओपीडी में प्रतिदिन आठ से 10 मरीज शिकायत लेकर आते हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीएस सोढ़ी बताते हैं कि जिन लोगों को यह बीमारी है, वह धूम्रपान से ही परहेज करें। इनहेलर और सांस में राहत के लिए जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते रहें। परहेज नहीं करने पर यह बीमारी गंभीर स्टेज में चली जाती है, जिसमें मरीज की मृत्यु भी हो जाती है। अप्रैल 2023 से लेकर अक्तूबर तक 2349 मरीज अस्पतालों में पहुंचे। इनमें 1415 पुरुष और 934 महिलाएं शामिल हैं।
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सीओपीडी की जांच :- स्पाइरोमेटरी (कंप्यूटर के जरिए फेफड़ों की जांच) है।
सीओपीडी के लक्षण

- सुबह के समय खांसी और गले में खिच-खिच रहना।

- थोड़ा भी काम करते वक्त या पैदल चलने पर सांस फूलना।

- नहाते और कपड़े पहनते हुए भी सांस फूलना।

- हाथों और पैरों में सूजन होना।

- गंभीर अवस्था होने पर फेफड़े फेल हो जाना।
सीओपीडी होने के प्रमुख कारण
- चिमनियों से निकलने वाला धुआं।

- उपलों के जलने से निकलने वाला धुआं और वेल्डिंग का धुआं।

- धूम्रपान खासकर सिगरेट के कश।

बचाव के लिए यह करें

- सीओपीडी के मरीजों को मुंह पर मास्क पहनकर घर से निकलना चाहिए।

- धुआं उगलने वाले औद्योगिक क्षेत्र में ना रहें।

- धूम्रपान बिलकुल ना करें।

- इनहेलर का इस्तेमाल करें तथा सांस में राहत के लिए दवाएं लें।
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