सहारनपुर। हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाकर हत्या करने की घटना से हर कोई आहत है। अमर उजाला फाउंडेशन कई साल से अपराजिता नाम से मुहिम चला रहा है, जिसमें महिलाओं खासकर बच्चियों को मजबूत बनाने तथा उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की सीख दी जा रही है। मगर, उसके बावजूद समाज में प्रतिदिन महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक घटना सिस्टम और सभ्य समाज पर सवाल खड़े करती हैं।
अमर उजाला ने सहारनपुर के गण्यमान्यों से संवाद किया। ज्यादातर ने कानून को सख्त बनाने तथा त्वरित न्याय मिलने का पक्ष रखा। अमर उजाला के प्रयास को सराहा गया। ज्यादातर ने बेटियों को जागरूक करने तथा अच्छे और बुरे में फर्क करना सिखाने तथा बेटों को अधिक शिक्षित बनाने पर जोर दिया। वरिष्ठ नागरिक वीरेंद्र बहल, राजेश्वर कुमार जैन, दानिश सिद्दीकी आदि मौजूद रहे। पेश हैं लोगों की ओर से रखे गए पक्ष के कुछ अंश...
- महिला थाने में काउंसलर सुरभि का कहना था कि पुरुष प्रधान समाज महिला को केवल इस्तेमाल की चीज समझता है। पुरुषों को यह सोच बदलनी होगी, क्योंकि उनके भी घर में मां, बहन और बेटियां हैं।
- समाजसेवी मीरा मित्तल ने कहा कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा बदल देना चाहिए। अब बेटे पढ़ाओ और बेटी बचाओ वाला नारा होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून लाने की मांग उठाई।
- सेंट मैरी स्कूल की प्रधानाचार्य सुषमा बजाज ने बेटियों को सेल्फ डिफेंस सिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म करने वाले को फांसी की सजा भी कम है बल्कि इससे भी कोई बड़ी सजा हो तो वह देनी चाहिए।
- ब्यूटीशियन पूनम बाली ने पीड़िताओं को त्वरित न्याय दिए जाने के लिए कानून में बदलाव लाने की बात कही। उनका कहना था कि पीड़िताएं सालों तक न्याय के लिए भटकती हैं। कई बार उनकी मौत के बाद फैसले आते हैं।
- केएलजी स्कूल की प्रधानाचार्य बबीता मलिक ने कहा कि सरकार बेटियों को बचाने के लिए तमाम कदम उठा रही है, मगर उसके बावजूद बेटियों पर अत्याचार कम नहीं हो रहे हैं। बेटों को संस्कार दिए जाने की जरूरत है।
- पार्षद चंद्रजीत सिंह निक्कू ने कहा कि बेटों को संस्कार देने के साथ ही बेटियों को गुड टच और बैड टच की सीख देनी होगी। यदि आधी आबादी यानी महिलाएं एकजुट हो जाएं, तो घटनाएं अपने आप कम हो जाएं। उन्होंने कहा कि कानून कमजोर नहीं है।
- डॉक्टर पूजा ने कहा कि दुष्कर्म की घटनाओं में लोग यहां तक की राजनीतिक दल भी हिंदू और मुस्लिम तलाशते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। दुष्कर्म करने वाला कोई भी हो सजा बराबर मिलनी चाहिए। राजनीति नहीं होनी चाहिए।
- पार्षद ज्योति अग्रवाल ने कहा कि पैरेंट्स की ओर से बच्चों की हर एक गतिविधि पर नजर रखने की जरूरत है। कानून में बदलाव और सख्ती भी लानी जरूरी है, मगर संस्कार और अच्छी सीख परिवार से ही मिलती है।
- नारी सशक्तिकरण की अध्यक्ष मिट्टी छाबड़ा ने बेटियों के साथ ही बेटों पर भी नजर रखने की अपील अभिभावकों से की। कहा कि महिलाओं पर सबसे अधिक अत्याचार महिलाएं ही करती हैं। कानून ऐसा हो, जिसका हर व्यक्त को डर हो।
- अक्षरज्ञान की निदेशक प्रियंका रावत ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों को सही और गलत में फर्क करना सिखाना चाहिए। बच्चों की जरूरतों को पूरा करें, जिद नहीं। पैरेंट्स को बच्चों के टीचर्स के संपर्क में रहना चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट की वकील फरहा फैज ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाने के साथ ही जब बच्चा किशोरावस्था में कदम रखता है, तब उस पर अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यही वह उम्र होती है, जिसमें सही और गलत बताना जरूरी है। कानून कमजोर नहीं है।
- पार्षद मंसूर बदर ने दुष्कर्म करने वालों को त्वरित सजा दिए जाने की पैरवी की। उनका कहना था कि हमें बेटों के साथ ही बेटियों को भी अपनी रक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना चाहिए। पैरेंट्स को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। आज कल स्मार्ट फोन बच्चों पर हैं, जिनको समय-समय पर चेक करना जरूरी है।
- समाजसेवी सईद सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुष्कर्मियों को फांसी पर लटकाने के लिए सख्त कानून लाने की अपील की। साथ ही अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद की तरह हर गली और मोहल्ले में बैठकें करने की जरूरत बताई।
मीरा मित्तल- फोटो : SAHARANPUR
सुषमा बजाज- फोटो : SAHARANPUR
पूनम बाली- फोटो : SAHARANPUR
बबीता मलिक- फोटो : SAHARANPUR
चन्द्रजीत सिंह निक्कू- फोटो : SAHARANPUR
डा पूजा- फोटो : SAHARANPUR
ज्योति अग्रवाल- फोटो : SAHARANPUR
मिटटी छाबडा- फोटो : SAHARANPUR
प्रिंयका रावत- फोटो : SAHARANPUR
फरहा फैज- फोटो : SAHARANPUR
मंसूर बदर- फोटो : SAHARANPUR
सईद सिद्दीकी- फोटो : SAHARANPUR
विक्रम बहल- फोटो : SAHARANPUR
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विचार रखती बबीता मलिक- फोटो : SAHARANPUR