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साल में लाखों का भुगतान, जिला अस्पताल फिर भी बेहाल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि सरकारी अस्पतालों का कायाकल्प हो, लेकिन जिला अस्पताल में उनकी मंशा के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा है। मरम्मत के नाम पर साल में एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल की हालत खस्ता बनी हुई है। खास बात यह है कि मरम्मत का ठेका सत्ताधारी पार्टी के विधायक देवेंद्र निम के एक परिजन के नाम है, जिसकी वजह से अस्पताल के अधिकारी उनसे पूरा काम नहीं ले पा रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को जिला अस्पताल का लाइव कर मरम्मत कार्यों की पड़ताल की। कहीं शौचालयों से दरवाजे गायब मिले तो कहीं सेफ्टी टैंक के ढक्कन टूटे मिले। वार्डों की खिड़कियों में दीमक लगी मिली। जाली भी जगह-जगह से फटी हुई है। पानी बहने की वजह से कई जगह भवन में सीलन बनी हुई है, जो भवन को कमजोर बना रही है। पेश है रिपोर्ट...
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अनदेेखी में जर्जर हो रहा करोड़ों का भवन
जिला अस्पताल की मुख्य इमारत के बाहर निकला हुआ छज्जा कई जगह से टूटा हुआ है, जिसकी मरम्मत कराने की बजाय टूटे हुए पर ही रंगाई पुताई करा दी गई है, जिसके सरिए बाहर निकलने को हैं। सर्जिकल वार्ड के पीछे सेफ्टी टैंक के ढक्कन टूटे पड़े हैं, जिनमें से दुर्गंध बाहर आ रही है। तमाम नालियां टूटी पड़ी हैं। कई जगह सीवर के ढक्कन टूटे पड़े हैं। बच्चा वार्ड के नीचे टाइल्स उखड़ी हुई मिली। मुख्य इमारत के सामने बने पार्क की चहारदीवारी पर लगी लोहे की ग्रिल जगह-जगह से गायब हो चुकी है। अस्पताल के बाहर की दीवार भी जर्जर हो चुकी है, जिसका प्लास्टर कई जगह से उतर चुका है।
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शौचालयों की हालत खराब
जिला अस्पताल में शौचालयों की हालत बेहद खराब है। सर्जिकल वार्ड के सामने बने रैन बसेरे के शौचालय पर दरवाजा ही नहीं है। टूटा हुआ दरवाजा बगल के स्नानघर में रखा है। मुख्य इमारत में प्रथम तल पर बने जनरल वार्ड के लिए शौचालय की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
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खिड़कियों को चट कर रही दीमक, जाली भी फटी
अस्पताल के वार्डों की खिड़कियों से मच्छरों के प्रवेश को रोकने के लिए लोहे की जाली लगाई गई थी। सर्जिकल वार्ड के पीछे की खिड़कियों पर जाली के लिए लगे लकड़ी के फ्रेमों को दीमक चट कर चुकी है। अब केवल जालियां लगी हैं। जाली भी फट चुकी है। ओपीडी के पीछे भी जाली फटी है, जिसके जरिए मच्छरों को रोकने के लिए कागज लगाया गया है।
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कहीं शुद्ध पेयजल तो कहीं टंकियों का सादा पानी
जिला अस्पताल में कहीं तो पेयजल के लिए फ्रिज लगाए गए हैं और कहीं मरीज और तीमारदार टंकियों का सादा पानी पीने को मजबूर हैं। प्रथम तल पर बने वार्ड में 24 घंटे मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन यहां पेयजल के लिए मात्र एक टंकी है, जिसमें सादा पानी आता है। अस्पताल परिसर में बाहर सड़क पर लगा करीब दस लाख रुपये का पेयजल प्लांट भी अक्सर खराब ही रहता है।
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- प्रमुख अधीक्षक की जिम्मेदारी है कि वह ठेकेदार से काम ले। यदि ठेकेदार काम नहीं कर रहा है तो उसकी लिखित में शिकायत करे। रही बात विधायक की मां के नाम ठेके की तो वह कई साल से उनके ही नाम है। इस बार बाकी टेंडर जैम पोर्टल से कर लिए गए हैं केवल मरम्मत का टेंडर रुका हुआ है, जिसे भी जैम पोर्टल के माध्यम से करेंगे। जो फॉर्म शर्तों को पूरा करेगी उसी को टेंडर मिलेगा।
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डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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मां के नाम अब नहीं है ठेका : विधायक
विधायक देवेंद्र निम का कहना है कि जिला अस्पताल में मरम्मत कार्यों का ठेका उनकी मां के नाम पूर्व में था फिलहाल नहीं है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जो कार्य अधूरे हैं या नहीं हो रहे हैं उनके लिए सीएमएस जिम्मेदार हैं क्योंकि वह बजट नहीं होने की बात कहकर कार्य आदेश जारी नहीं करते हैं।
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