कई घंटे तक चले हंगामा और प्रदर्शन के बाद करीब 4:30 बजे पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री राजा अमरेंद्र सिंह, प्रगट सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और पांच विधायकों व कई अन्य नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है। इन सभी को बस में बैठाकर सरसावा थाने ले जाया गया है। नवजोत सिंह सिद्धू और कैबिनेट मंत्री राजा अमरेंद्र सिंह ने अपने तमाम समर्थकों से कहा कि बाकी लोग यहीं रहेंगे। आगे नहीं जाएंगे। सभी लोगों ने नारेबाजी करते हुए इस पर अपनी सहमति भी जताई।
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उधर, कांग्रेस नेता व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष सहित दिग्गज नेताओं ने शामली के रास्ते से गुरुवार को लखीमपुर खीरी कूच करने के लिए यूपी में प्रवेश करना चाहा। इस दौरान पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया। इसके विरोध में कांग्रेस नेता वहीं पर धरना देकर बैठ गए। उन्होंने सीएम योगी और पीएम मोदी सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी भी की।
बताया गया कि करीब दो घंटे तक हंगामा करने के बाद कांग्रेस नेता वापस लौट गए। इसके बाद प्रशासन ने बॉर्डर पर यातायात सेवाएं शुरू करा दी।
बता दें कि गुरुवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के पार्टी विधायकों, मंत्रियों और नेताओं के साथ लखीमपुर खीरी जाने की सूचना के बाद शामली में भी पुलिस-प्रशासन चौकन्ना हो गया था। सुबह ही यमुना के पुल पर वाहनों को खड़ा करके हरियाणा की ओर से आने वाले वाहन रोक दिए गए। जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोगों को पैदल ही दोनों राज्यों की सीमा में प्रवेश करना पड़ा।
दरअसल, लखीमपुर खीरी में आंदोलन के दौरान किसानों की मौत होने के बाद वेस्ट यूपी के किसान आक्रोशित हैं। इसके बाद वेस्ट यूपी के जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी को लेकर विपक्षी दल के नेता भी आक्रोशित हैं। इसके चलते विभिन्न जिलों से गुजरने वाले हाईवे व ग्रामीण क्षेत्र में पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है। ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े।
एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने पश्चिमी यूपी के जिलों में अलर्ट जारी करने के निर्देश दे दिए हैं। लखनऊ से अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सभी जिलों के डीएम व एसएसपी ने सुरक्षा संबंधी निर्देश देते हुए थाना पुलिस को मुस्तैद कर दिया है। खासतौर पर हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय किसान नेता पर निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस का फोकस है कि पश्चिमी के किसान नेता व विपक्षी दलों के कार्यकर्ता लखीमपुर खीरी न जा पाएं।