फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेशी और देशी नस्ल का क्रास ब्रिड वनराजा का अब कीजिए पालन

विज्ञापन
वनराजा - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
कड़कनाथ के बाद अब वनराजा पालन के लिए प्रोत्साहित कर रहा केवीके
विज्ञापन

सहारनपुर। किसानों की आय बढ़ाने के अभियान में जुटा केवीके अब वनराजा प्रजाति की मुर्गीपालन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। देशी और विदेशी नस्ल की यह क्रास ब्रिड तेजी से विकसित होता है। इस प्रजाति को अंडों और मांस दोनों के लिए पसंद किया जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र ग्रामीण युवाओं को इस प्रजाति के चूजे निशुल्क दे रहा है।
मुर्गे की कड़कनाथ प्रजाति के बाद अब कृषि विज्ञान केंद्र वनराजा प्रजाति के पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। केवीके की आर्या परियोजना के तहत ग्रामीण युवाओं को इसके चूजे दिए जा रहे हैं। इसके लिए ऋषिकेश स्थित सरकारी पॉल्ट्री फार्म से इस प्रजाति के चूजे मंगवाए जा रहे हैं। केवीके के पशुपालन वैज्ञानिक डॉक्टर प्रमोद कुुमार ने बताया कि मुर्गीपालन के लिए चूजे देने से पूर्व पॉल्ट्री आवास, फीडिंग और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रजाति का चूजा देशी प्रजाति की तुलना में तेजी से विकसित होता है। इसकी अंडा देने की क्षमता भी तुलनात्मक रूप से अधिक है।
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि आर्या परियोजना के तहत चयनित ग्रामीण युवाओं को ही वनराजा प्रजाति के चूजों को दिया जा रहा है। इस प्रजाति की मुर्गियां बहुरंगी पंखों वाली होती है। जिससे वह देखने में देशी मुर्गी की तरह ही होता है।
विज्ञापन

क्रॉस ब्रिड है वनराजा
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि मुर्गियों की वनराजा प्रजाति देशी और विदेशी नस्ल की क्रॉस ब्रिड है। इसे विदेशी प्रजाति आरआईआर अैर देशी नस्ल असील को क्रास कर तैयार किया गया है। इस प्रजाति की मुर्गी एक वर्ष में 260 से अधिक अंडे दे सकती है। जबकि इसके चूजे चार महीने में तीन किलो तक के हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि वनराज प्रजाति की मुर्गी किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें