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एनसीआर की खटारा बसें भेजी जा रहीं सहारनपुर डिपो में

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सहारनपुर। एनसीआर में वाहनों के निर्धारित समय सीमा के संचालन का खामियाजा सहारनपुर डिपो को भुगतना पड़ रहा है। एनसीआर की दस साल पुरानी खटारा बसों को सहारनपुर डिपो के हवाले किया जा रहा है, जबकि नई बसों को एनसीआर के डिपो मुजफ्फरनगर एवं खतौली भेजा जा रहा है।
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सहारनपुर मंडल के दो जिले में, जिनमें रोडवेज के अब चार डिपो हो चुके हैं। मुजफ्फरनगर, खतौली, शामली और जलालाबाद शामिल हैं। जबकि सहारनपुर एनसीआर से बाहर है। शामली में तो अनुबंधित बसें चल रहीं हैं, जबकि जलालाबाद अभी नया डिपो बनाया गया है। जिसमें सहारनपुर से अच्छी हालत की बसों को भेज दिया गया है। मुजफ्फरनगर और खतौली डिपो में निगम की बसें चल रही हैं। एनसीआर में दस साल पुराने वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध है। मुजफ्फरनगर एवं खतौली डिपो के एनसीआर में होने के चलते इन डिपो की दस साल की मियाद पूरी करने वाली बसों को हटा दिया जाता है। दस साल की मियाद पूरी करने वाली बसों को हर साल सहारनपुर डिपो में भेजा जा रहा है। इस साल भी खतौली और मुजफ्फरनगर डिपो की पुरानी हो चुकी 20 बसों को सहारनपुर डिपो में भेज दिया गया। सहारनपुर डिपो में गिनती में बसें काफी हो चुकी हैं, लेकिन अधिकांश बसें दस साल से अधिक पुरानी हैं। जबकि सहारनपुर परिक्षेत्र को मिलने वाली नई बसों को मुजफ्फरनगर और शामली डिपो में भेजा जा रहा है। जबकि पुरानी बसें लंबे रूट पर चलाई जा रहीं हैं और कहीं भी खराब होकर खड़ी हो जाती हैं।
20 बसें भेजी गईं हैं सहारनपुर डिपो में: एआरएम
सहारनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि एनसीआर में होने के चलते मुजफ्फरनगर और खतौली डिपो में दस साल पुरानी बसों का संचालन नहीं किया जा सकता। ऐसे में उन बसों को सहारनपुर डिपो में भेजा जा रहा है। इस साल बीस बसें आईं हैं। जिन्हें देहरादून, हरिद्वार एवं अन्य ग्रामीण रूटों पर लगाया गया है।
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