- जांच में नगर निगम की लापरवाही आई सामने
- पिंजरा पोल समिति को चारा उगाने के लिए 1956 में दी गई थी जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर में नजूल भूमि को लेकर बड़ी अनियमितता सामने आई है। जिस नजूल भूमि का खसरा नंबर नगर निगम के संपत्ति रजिस्टर में दर्ज होना था। वह लापरवाही के चलते दर्ज नहीं हो सका। अब नजूल के साथ अन्य काश्तकारों की निजी भूमि पर भी कब्जा हो गया। राजस्व विभाग अन्य दस्तावेजों की छानबीन में लगा है। मामला सरकारी भूमि पर कब्जे से संबंधित है।
दरअसल, वर्ष 1956 में पिंजरा पोल समिति को चारा उगाने के लिए खसरा नंबर 1286 की करीब चार हेक्टेयर भूमि 90 वर्ष की लीज पर दी गई थी। हर 30 वर्ष बाद लीज का नवीनीकरण होना था। लीज के पहले 30 वर्ष 15 अगस्त 1986 को समाप्त हो गए। नजूल भूमि की फ्री होल्ड नीति घोषित होने के बाद उस समय नगर पालिका परिषद सहारनपुर ने भूखंड को फ्री होल्ड करने के लिए करीब 64 लाख रुपये का डिमांड नोटिस सोसायटी को भेजा। इस पर सोसायटी ने आपत्ति दर्ज कराई कि संबंधित जमीन पर कब्जा है। मामले के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन ने जांच बैठा दी। पालिका परिषद के तत्कालीन अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने भी भूमि को नजूल की मानते हुए अपनी आख्या में कहा कि भूमि को फ्री होल्ड से मुक्त रखना उचित होगा।
आसपास के खसरे में नाम दर्ज एक समान, इसी से गड़बड़ी
महानगर में स्थित नजूल भूमि के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंप दी गई थी। नगर निगम में संपत्ति रजिस्टर में संपत्ति तो नाम से दर्ज है लेकिन उनके खसरे नंबर दर्ज नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 1281 दरगाह हाजी शाह कमालुद्दीन के नाम दर्ज है, जबकि खसरा नंबर 1286 हाजी शाह दर्ज है। दोनों नाम एक समान से हैं। जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 1283 निजी काश्तकार की है। इस खसरे नंबर की 1130 वर्गमीटर जमीन पर भी कब्जा हो गया।
कब्रिस्तान के रकबे में हो गई बढ़ोतरी
जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 1286 रकबा 16-0-0 कब्रिस्तान के नाम दर्ज है तथा खतौनी साल 1425 फसली के खाता नंबर 111 में खसरा नंबर 1286 रकबा 4.098 हेक्टेयर कब्रिस्तान के नाम दर्ज है। 1359 फसली के खसरे में अंकित कब्रिस्तान का रकबा कम है और वर्तमान खतौनी 1425 फसली में कब्रिस्तान का रकबा अधिक है।
वर्जन
मामले में राजस्व विभाग और नगर निगम मिलकर जांच कर रहे हैं। कुछ दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कुछ निजी खसरे नंबर भी जांच सामने आए हैं। विस्तार से जांच जारी है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - सलिल कुमार पटेल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व