24 घंटे गोल्डन कार्ड साथ रखें लाभार्थी
सहारनपुर। जिस तरह दिल के मरीजों को 24 घंटे सोर्बिट्रेट गोली अपने साथ रखने की सलाह दी जाती है। उसी तरह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड साथ रखना जरूरी है। हादसा होने पर गोल्डन कार्ड जान बचाने का काम कर सकता है। हार्ट अटैक आने पर मरीज सोर्बिट्रेट को जीभ के नीचे रख लेता है, जिससे उसकी जान बचने की संभावना बन जाती है।
योजना के नोडल अधिकारी डॉक्टर सुशील गुप्ता ने कहा कि घर के बाहर सड़क हादसा या अन्य घटना होने पर व्यक्ति को तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाता है। सरकारी अस्पताल में मौजूद सुविधाओं के हिसाब से इलाज किया जाता है। गंभीर हालत होने पर परिजनों को पहुंचने में देर होती है। या कई बार परिजनों के पहुंचने पर भी पैसे के अभाव में घायल के साथ अनहोनी हो जाती है। मगर यदि व्यक्ति के पास आयुष्मान भारत योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का गोल्डन कार्ड होगा, तो उसे अच्छे निजी चिकित्सालय मेें भर्ती कराया जा सकता है। इसलिए लाभार्थी हर वक्त गोल्डन कार्ड अपने साथ रखें।
लाभार्थी परिवारों की संख्या
जनपद में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी परिवारों की संख्या 1,15,023 है। इन परिवारों के सदस्यों की अनुमानित संख्या पांच से छह लाख है। यानी पांच से छह लाख गोल्डन कार्ड धारक होंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री जन आरोग्य के लाभार्थी परिवार 22087 हैं, जिनके गोल्डन कार्ड धारकों की संख्या एक लाख से अधिक मानी गई है।
अभी तक इलाज की स्थिति
आयुष्मान योजना के तहत अभी तक जनपद के 3680 लाभार्थी इलाज पा चुके हैं, जिनके इलाज पर सरकार ने दो करोड़ 85 लाख 93 हजार 774 रुपये खर्च किए हैं। बड़ी संख्या में लोग वर्तमान में भी उपचार करा रहे हैं।
अस्पतालों की संख्या
दोनों योजनाओं से कुल 42 अस्पताल जुड़े हैं, जिनमें 24 सरकारी और 18 निजी अस्पताल हैं। इन 18 निजी अस्पतालों में शहर के बड़े अस्पताल भी शामिल हैं, जिनमें गंभीर से गंभीर बीमारी के इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध है।