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फिर राजनीतिक विरासत नहीं बचा सके काजी और चौधरी परिवार

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फिर राजनीतिक विरासत नहीं बचा सके काजी और चौधरी परिवार
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सहारनपुर। पश्चिमी यूपी में राजनीति की धुरी रहे काजी और चौधरी परिवारों के लिए घर में ही राजनीतिक विरासत बचाना मुश्किल हो रहा है। बीते कई चुनावों से दोनों घराने मात खाते आ रहे हैं। अब गंगोह विधानसभा उपचुनाव में भी वही कहानी दोहराई गई।
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काजी रशीद मसूद और चौधरी यशपाल सिंह का राजनीतिक रसूख रहा है। काजी रशीद मसूद करीब छह बार सांसद और केंद्र में मंत्री रहे, जबकि यशपाल सिंह भी कई बार विधायक, एक बार सांसद और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे। दोनों ही परिवार गंगोह से ताल्लुक रखते हैं। मगर दोनों ही परिवारों में काजी रशीद मसूद और चौधरी यशपाल सिंह के बाद कोई राजनीतिक विरासत बचा नहीं सका है। काजी परिवार से इमरान मसूद दो बार लोकसभा और दो बार विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद भी एकबार लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी नोमान मसूद को भाजपा के प्रदीप चौधरी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। अब गंगोह विधानसभा के उपचुनाव में भी नोमान हार गए। इसी तरह चौधरी यशपाल सिंह के बाद उनके भतीजे डा. सुशील चौधरी एक बार नकुड़ से विधायक बने, जबकि उनके बेटे इंद्रसेन दो बार और रुद्रसेन एक बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।
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