मूल गुणों से निर्दोष पालन से होता है कल्याण : वीर सागर
सहारनपुर। जैन बाग स्थित प्राचीन जैन जिनालय में जैन मुनि 108 वीर सागर महाराज ने कहा कि 28 मूल गुणों का निर्दोष पालन करने से ही अपना और विश्व का कल्याण होता है।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज के 52 वे दीक्षा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जैन मुनि वीर सागर महाराज ने कहा कि पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज ने अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पित रहते हुए 52 वर्ष पूर्व जैन मुनि के रूप में दीक्षा ग्रहण की थी। यह भारतवर्ष के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी। क्योंकि, 22 वर्ष की आयु वाले युवक की सीधे मुनि के रूप में दीक्षा हुई थी, जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था, लेकिन आचार्य श्री ज्ञानसागर ने संत शिरोमणि विद्यासागर महाराज को पूर्ण रूप से परखने के बाद मुनि के रूप में दीक्षा प्रदान की थी। वह जानते थे कि आज का यह युवक कालांतर में पूरे भारतवर्ष में धर्म की गंगा को अविरल रूप से प्रवाहित करेगा और देश में दया, अहिंसा, करुणा, शिक्षा, धर्म के प्रचार प्रसार में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित करेगा। आचार्य ज्ञानसागर का यह पूर्वानुमान शत-प्रतिशत सत्य सिद्ध हुआ।
उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज जैन दर्शन और आगम में उल्लेखित जैन मुनि की चर्या के 28 मूल गुणों का निर्दोष पालन करने और वाले संत अंतरंग से निर्दोष चर्या का पालन करता है ,वही संत अपने कल्याण के साथ साथ विश्व के कल्याण के लिए निमित्त बन सकता है।
इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि ऐसे तपस्वी साधक भगवान आदिनाथ के समय की चर्या करने वाले सच्चे साधु एवं 28 मूल गुणों का निर्दोष रूप से पालन करने वाले संत हमने पहली बार देखे हैं। अत: हमारा कर्तव्य बनता कि पूरा जैन समाज जैन मुनियों के चरणों में समर्पित होकर धर्म लाभ प्राप्त करें। इस दौरान महामंत्री संजीव जैन, कोषाध्यक्ष अरुण जैन, नवीन जैन, रवि, विशाल जैन, चंद्र जैन ,कुलभूषण जैन, सीए अनिल जैन, सुधीर जैन, प्रवीण जैन, दीपक जैन, प्रकाम जैन, संजय जैन सुुरेंद्र जैन, राजीव जैन आदि मौजूद रहे।