सहारनपुर। दस जनवरी को चंद्रग्रहण को लेकर ज्योतिष में मतभेद उभर आया है। सहारनपुर के ज्योतिषाचार्य साफ कहते हैं कि चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, जब चंद्रग्रहण दिखेगा ही नहीं तो फिर राशियों पर असर या सूतक कैसे लग जाएगा। सहारनपुर के विद्वान की विप्रों की सबसे बड़ी संस्था विप्र परिवार पारित तिथि-व्रतोत्सव पत्रिका में इन्हीं कारणों से इस चंद्र ग्रहण का कोई उल्लेख नहीं किया है।
साल 2020 के पहले महीने अर्थात जनवरी की 10 तारीख को चंद्र ग्रहण के बारे में विभिन्न मत सामने आ रहे हैं। देश के कई ज्योतिषी चंद्रग्रहण कह रहे हैं और राशियों पर असर भी बता रहे हैं। इंटरनेट पर भी खूब खबरें हैं, लेकिन सहारनपुर के विप्र परिवार के ज्योतिषी कहते हैं कि दस तारीख को भारत में कोई चंद्रग्रहण नहीं होगा बल्कि उनका कहना है कि 10 जनवरी को पड़ने वाला ग्रहण वास्तव में चंद्रग्रहण ना होकर चंद्रमा की उपछाया ग्रहण कहलाएगा। उपछाया ग्रहण के बारे में यदि विचार करें तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह चंद्र ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता है क्योंकि इस उपग्रहण के दौरान चंद्रमा के अंदर कुछ मलिनता आ जाती है और उपछाया के दौरान चंद्रमा का बिंब थोड़ा सा धुंधला दिखाई पड़ता है एवं काला नहीं होता। इसी कारण धर्म शास्त्रों एवं शास्त्रकारों ने इस प्रकार के चंद्र बिम्ब पर मात्र मालिन्य छाया आने के कारण इसे ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा।
उपग्रहण का ये होगा समय
उपग्रहण का समय भारतवर्ष में 10 जनवरी की रात्रि 10:38 मिनट पर प्रारंभ होगा एवं मोक्ष काल 11 जनवरी की देर रात्रि 2:42 पर होगा अर्थात इस चंद्र उपग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे से कुछ ज्यादा रहेगी। उपछाया ग्रहण के लिए किसी भी प्रकार के सूतक, स्नान, दान आदि के महत्व का विचार भी नहीं होगा। सहारनपुर के विद्वान विप्रों की सबसे बड़ी संस्था विप्र परिवार (सनातन संरक्षण संघ) की ओर से पारित तिथि, व्रतोत्सव पत्रिका में भी इस चंद्र ग्रहण का कोई उल्लेख नहीं है।
महंत राघवेंद्र स्वामी श्री राम पंचायतन सिद्ध पीठ, मानस निकेतन, पंत विहार, सहारनपुर
चंद्रग्रहण नहीं उपछाया है
ये चन्द्रग्रहण नहीं बल्कि चंद्रमा की उपछाया है। ज्योतिष ग्रंथों में इसे चंद्र मालिन्य भी कहते हैं। ये चंद्रग्रहण से पूर्व की स्थिति होती है क्योंकि चंद्रग्रहण ग्रस्त नहीं होगा। ये जो कुछ ज्योतिष इंटरनेट पर बता रहे हैं, वह लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
आचार्य रोहित वशिष्ठ, ज्योतिषचार्य और अधिष्ठाता श्री बगुलामुखी शिव मंदिर ब्रह्मपुरी कालोनी
राशियों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव
जब चंद्रग्रहण है ही नहीं तो कैसे राशि पर असर पड़ेगा। ज्योतिषियों को अपनी परंपरा के अनुसार सारी जानकारी के बाद ही कुछ कहना चाहिए। उपछाया इसलिए इसे कहा जा रहा है कि प्रत्येक चंद्रग्रहण घटित होने से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में अवश्य प्रवेश करता है, जिसे चन्द्र मालिन्य कहा जाता है न कि चंद्रग्रहण।
पंडित जितेन्द्र शांडिल्य, ज्योतिषाचार्य पुराना शुगर मिल क्षेत्र
पंचांग में नहीं है चंद्रग्रहण का जिक्र
पंचांग में इस चंद्रग्रहण का कहीं कोई जिक्र नहीं है। हम भी इंटरनेट आदि के माध्यमों से तमाम बातें सुन और देख रहे हैं। जो उचित नहीं है। कई लोगों के इस बाबत फोन आ रहे हैं। जिन्हें बताया जा रहा है कि दस जनवरी को कोई चंद्रग्रहण नहीं होगा तो फिर कोई सूतक भी नहीं लगेगा।
पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय, ज्योतिषाचार्य व अधिष्ठाता तहसील शिव मंदिर
महंत राघवेंद्र स्वामी।- फोटो : SAHARANPUR
पंडित जितेंद्र शांडिल्य।- फोटो : SAHARANPUR
पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय।- फोटो : SAHARANPUR