जयंत चाैधरी की स्वाभिमान रैली
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अठनी-चवन्नी की बयानबाजी के बीच जयंत का राजनीतिक संदेश
रैली में जयंत चौधरी ने विरोधियों की ओर से की जा रही बयानबाजी को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी मानने के बजाय उसे राजनीतिक संकेत से जोड़ दिया। उन्होंने समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि रालोद पर बढ़ते हमले उसकी कमजोर नहीं, बल्कि सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि वह विवादों से बचना चाहते हैं, लेकिन बार-बार निशाना बनाए जाने पर समय आने पर जवाब दिया जाएगा।
चौधरी चरण सिंह की विरासत को लेकर भी बड़ा संदेश
जयंत चौधरी ने कहा कि राजनीतिक रूप से अलग रास्तों पर जाने के बावजूद चौधरी चरण सिंह के सम्मान के मुद्दे पर सभी को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिलाने को किसान समाज के लिए बड़ा सम्मान बताया।
उन्होंने कहा, 'चौधरी चरण सिंह का परिवार कौन है? आप हैं।' जयंत ने पाल, यादव, गुर्जर और जाट समेत किसान समाज के तमाम वर्गों को चौधरी चरण सिंह की विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जिस समाज को लंबे समय तक राजनीतिक हाशिये पर रखा गया, उसे राजनीतिक पहचान और आवाज देने का काम चौधरी चरण सिंह ने किया।
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सहारनपुर में जयंत चाैधरी की स्वाभिमान रैली
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चीनी महंगी होने के सवाल पर रसगुल्ले से पलटवार
गन्ना किसानों के मुद्दे पर जयंत चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए चीनी, रसगुल्ले और गुलाब जामुन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चीनी और मिठाइयां महंगी दिखाई देती हैं, लेकिन किसान की लागत और उसकी आय की चिंता नहीं दिखाई देती।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता भी किसान है, लेकिन उत्पादक किसान के हितों की कीमत पर उपभोक्ता को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उत्पादक किसान का हित भी सुरक्षित रहना चाहिए। जयंत ने तंज कसते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर विपक्ष को चिट्ठी भी लिखेंगे और अगर वे राजी हुए तो लखनऊ अच्छा-सा रसगुल्ले का पैकेट भी भेजेंगे।
गन्ने के भाव को लेकर भी साधा निशाना
जयंत चौधरी ने 2026-27 के गन्ना सत्र के भाव का जिक्र करते हुए अपने पुराने चुनावी अभियान की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि अगर सीटें 400 पार होंगी तो गन्ने का रेट भी 400 पार होगा। उन्होंने कहा कि गन्ने के मुद्दे पर राजनीति करने वालों को किसान की कमाई और उसकी लागत पर बात करनी चाहिए।
जयंत चाैधरी की स्वाभिमान रैली
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पश्चिमी यूपी में युवाओं के नशे को बताया ‘साइलेंट एपिडेमिक’
रैली के दौरान जयंत चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं में बढ़ते सूखे नशे के प्रचलन पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इसे क्षेत्र में ‘साइलेंट एपिडेमिक’ का रूप लेती कुरीति बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी ओर से काम कर रही है, लेकिन जब समाज और जनता की नजर इस समस्या पर पड़ेगी, तभी अभियान का असर जमीन पर दिखाई देगा।
जयंत ने कार्यकर्ताओं से नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया। उन्होंने नशे से जूझ रहे युवाओं और उनके परिवारों से मदद लेने में शर्म न करने की अपील की और सरकार की टोल-फ्री हेल्पलाइन 14446 का भी उल्लेख किया।
युवाओं के लिए राजनीति से आगे रोजगार और कौशल का मुद्दा
जयंत चौधरी ने कहा कि अगली पीढ़ी के युवाओं के लिए केवल खेती में अवसर पर्याप्त नहीं हैं। जो युवा खेती में अपना भविष्य नहीं देखते, उनके लिए स्टार्टअप, कौशल और बेहतर शिक्षा के अवसर जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के तौर पर युवाओं के लिए कौशल और शिक्षा के अवसर बढ़ाना उनकी प्राथमिक कोशिशों में शामिल है।
जयंत चाैधरी की स्वाभिमान रैली
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NDA का जिक्र, चुनावी रणनीति का भी संदेश
जयंत चौधरी ने एनडीए के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और चौधरी चरण सिंह साथ आए थे और इसी गठबंधन के नाम में राष्ट्रवाद जुड़ा हुआ है। उन्होंने विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन पर भी तंज कसा और कहा कि वे साथ आने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक अपने समूह का नाम तय नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावी माहौल को देखते हुए तैयार रहने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।
अठनी-चवन्नी से शुरू होकर किसान और युवा मुद्दों तक पहुंचा संदेश
स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी का भाषण राजनीतिक पलटवार से शुरू होकर गन्ना किसान, चौधरी चरण सिंह की विरासत, युवाओं के रोजगार और पश्चिमी यूपी में नशे की समस्या तक पहुंचा। ‘अठनी-चवन्नी’ विवाद पर उन्होंने विरोधियों को जवाब दिया तो चीनी-रसगुल्ले के जरिए किसान और उपभोक्ता के बीच संतुलन की बात रखी। वहीं नशे के मुद्दे को उठाकर उन्होंने पश्चिमी यूपी के युवाओं से जुड़ा सामाजिक संदेश भी देने की कोशिश की।