सहारनपुर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी आज मनाई जाएगी। इस बार दुर्लभ जयंती योग जन्माष्टमी को खास बना रहा है। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूल मालाओं से सजाया गया है। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होंगे। लोगों ने घरों में लड्डू गोपाल के अभिषेक की भी तैयारी की है।
श्री कान्हा के स्वागत को श्री राधा-कुंज मंदिर, पंत विहार के श्री कृष्ण मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री हरि मंदिर, सिद्धपीठ श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री बागेश्वर महादेव मंदिर, श्री बालाजी धाम, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर सहित अनेक मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होंगे और झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। इसके साथ मंदिर में प्रभु कान्हा के लिए झूले लगाए गए हैं। रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्म होते ही पूजा अर्चना होगी। प्रभु को अभिषेक और श्रृंगार कर झूले में बैठाया जाएगा। तत्पश्चात माखन-मिश्री, मेवों, पेड़ों भोग लगाकर आरती उतारी जाएगी। व्रत रखने वाले लोग भी मंदिरों में पूजा अर्चना करेंगे।
- पुण्यदायी है दुर्लभ संयोग, विधिपूर्वक करें पूजा, 11:16 बजे होगा चंद्र उदय
श्री ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी विशेष योग से युक्त है। इस योग को जयंती योग कहते हैं। भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग के अंत में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग, वृष लग्न एवं चंद्रमा वृष राशि में मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था, जिस वर्ष जन्म के समय मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों का संयोग हो जाए, वह विशेष पुण्यदायक माना जाता है। इस वर्ष ऐसा ही योग बना है। इसके अतिरिक्त जन्म के समय हर्षण योग भी इस व्रत को खास बना रहा है।
हमेशा दो दिन जन्माष्टमी होती थी, लेकिन इस बार एक ही दिन जन्माष्टमी का संयोग है। रात्रि में चंद्रोदय होने पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा करें। इससे पहले उनके माता-पिता श्री वसुदेव, देवकी, नंद बाबा और यशोदा मां को प्रणाम करें। प्रभु का पंचामृत से स्नान कराएं। चंद्र उदय का समय 11:16 बजे है।