सहारनपुर/सरसावा। ढिक्का कलां से एटीएस के हत्थे चढ़े दो संदिग्ध आतंकियों की उम्र 20 व 22 साल है। चेहरे पर मासूमियत। दोनों ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन दोनों खतरनाक मंसूबे पाले बैठे थे। एटीएस की जांच में सामने आया कि दोनों सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म के जरिए हर रात नई-नई साजिशें रचते थे। उनके इरादों का पता चलने पर ग्रामीण भी हैरान हैं।
पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े शाहरुख और महकाब की गिरफ्तारी से गांव ढिक्का कलां में तरह-तरह चर्चाएं शुरू हो गई हैं। महकाब करीब तीन महीने पहले से पंजाब के लुधियाना में वेल्डिंग का काम कर रहा था। आठवीं पास है और लगभग 15 हजार रुपये महीना कमाता था। वह तीन भाइयों में तीसरे नंबर का है। महकाब के पास गांव में लगभग 10 बीघा जमीन है। शाहरुख पांचवीं तक पढ़ा हुआ है। करीब डेढ़ महीने पहले ही देहरादून में वेल्डिंग और टाइल-पत्थर लगाने का काम करने गया था। दोनों की गिरफ्तारी के बाद से परतें खुलती जा रही हैं।
एटीएस की जांच में सामने आया कि महकाब ने शाहरुख को अपने साथ जोड़ा था। दोनों दिन में काम करते थे और रात में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे। पढ़ने-लिखने में भले ही कम हो, लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रियता दर्शाती है कि उनके मंसूबे बेहद खतरनाक थे। दोनों के चेहरों से कोई शक भी नहीं कर पाता था।
पिता बोले-बेटे बेकसूर, पहले भी उठाकर ले गई थी एटीएस
पिता हसरत ने कहा कि बेटा महकाब बेकसूर है। वह मेहनत मजदूरी करके परिवार की मदद करता था। 15 दिन पहले ही गांव आया था। पहले भी उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। बेटे के नहीं होने से बकरीद पर नमाज तक नहीं पढ़ पाए। वह मोबाइल भी ठीक से चलाना नहीं जानता। वहीं, शाहरुख के भाई मुशर्रफ का कहना है कि हमें नहीं पता कि शाहरुख किसके संपर्क में आया। अगर वह फंडिंग या गलत काम से रुपये कमाता तो आर्थिक हालत ठीक होती। पाकिस्तान से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
गांव में नहीं दिखीं ईद की खुशियां
एटीएस की कार्रवाई के बाद से गांव ढिक्का कलां में चर्चा का माहौल बना रहा। बृहस्पतिवार को बकरीद के दिन जहां सामान्यत गांव में रौनक और खुशियां रहती थीं, वहीं इस बार दोनों परिवारों के घरों में मातम और बेचैनी का माहौल देखने को मिला।