आबादी के बीच उद्योग फैला रहे जहर, सांसों पर ‘कहर’
सहारनपुर। शहर की आबादी के बीच औद्योगिक इकाइयां जहर फैला रही हैं। फैक्टरियों का केमिकलयुक्त पानी नाली, नालों और नदियों में बह रहा है। अनेक जगहों पर चिमनियां जहरीला धुआं उगलकर हवा को दूषित कर रही हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंखें मूंदे बैठा है।
जिला उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में विभिन्न तरह के करीब दस हजार उद्योग पंजीकृत हैं। उपायुक्त के अनुसार अनेक ऐसे उद्योग हैं, जो प्रदूषण फैला रहे हैं। ऐसे उद्योगों की सूची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गई है। रिहायशी इलाकों में चल रहे इन उद्योगों की अमर उजाला की टीम ने रविवार को पड़ताल की। हिरनमारान क्षेत्र में जींस बनाने और होजरी की अनेक छोटी फैक्टरी मिलीं, जिनमें कपड़े को केमिकल में धोने और रंग करने का काम किया जाता है। अनेक फैक्टरी केमिकलयुक्त पानी को नालियों में बहा रही हैं। नूर बस्ती और खाताखेड़ी क्षेत्र में भी ऐसी कई फैक्टरी हैं। बेहट रोड पर गांव रसूलपुर के पास साबुन फैक्टरी रिहायशी इलाकों में चल रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन फैक्टरी में रबर और लकड़ी जलाई जाती है, जिसका धुआं बीमारियां फैला रहा है। इसी रोड पर हकीमपुरा के पास जींस बनाने की फैक्टरी मिली, जिसका केमिकलयुक्त पानी नाली में गिरता मिला। इसी रोड पर बनियान और अंडरवियर बनाने वाली फैक्टरी से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी से सड़क पर खड़े सरकारी पेड़ सूख रहे हैं। बेहट रोड के निवासी कई बार पुराने टायरों से तेल निकालने वाली फैक्टरी की शिकायत कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि टायर जलने से काला धुआं निकलता है, जिससे गांवों के लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हैं।
गांव सराय में भी एक फैक्टरी कपड़ों की धुलाई कर केमिकलयुक्त पानी ढमोला में डाल रही है। अंबाला रोड और मानकमऊ क्षेत्र में भी कई फैक्टरियों की चिमनियां धुआं उगल रही हैं। कमेला क्षेत्र में चर्बी की भट्ठियां लगातार प्रदूषण फैला रही हैं। खास बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास रिहायशी इलाकों में चल रही ऐसे उद्योगों का कोई डाटा नहीं है, जो किसी न किसी रूप में प्रदूषण फैला रहे हैं।
निगम के बाहर ही चल रही डेयरियां
सहारनपुर में डेयरी उद्योग काफी पुराना है। नगर निगम कई माह से डेयरियों को शहर से बाहर करने का अभियान चला रहा है। बीते दिनों ही 706 डेयरियों को नोटिस जारी किए थे। शहर भर से अनेक डेयरियों को बाहर किया जा चुका है। इससे डेयरी संचालकों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। मगर हैरत की बात यह है कि नगर निगम के गुरुद्वारा रोड पर खुले गेट के ठीक सामने डेयरियां चल रही हैं, जिन पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
कई बड़े उद्योग भी फैला रहे प्रदूषण
शहर में कई बड़े उद्योग भी हैं, जो केवल वायु प्रदूषण ही नहीं, जल और मृदा प्रदूषण भी फैला रहे हैं। इनमें एक बड़ी कंपनी भी शामिल है। किसी जमाने में उक्त उद्योग रिहायशी इलाके से बाहर थे, मगर शहर की आबादी बढ़ती गई और शहर का दायरा भी। वर्तमान में उक्त उद्योग पूरी तरह आबादी के बीच में हैं। कई बार प्रदूषण फैलाने की शिकायत भी हो चुकी है, मगर अधिकारी मौन हैं।
शासन के पूछने के बाद भी गंभीरता नहीं
रिहायशी इलाकों में प्रदूषण फैला रहे उद्योगों को लेकर एनजीटी सख्त रुख अपनाए हुए है। बीती छह फरवरी को सुनवाई थी, जिसमें प्रदेश सरकार के अधिकारियों को पेश होना था। एनजीटी के समक्ष आंकड़े रखने के लिए प्रदेश शासन ने नगर निगम को पत्र लिखकर रिहायशी इलाकों में चल रहे उद्योगों की संख्या पूछी थी, मगर निगम ने भी चिह्नित करने की कार्यवाही चलने की बात कहकर पीछा छुड़ा लिया। खास बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के पास इस तरह का कोई डाटा नहीं है।
वर्जन
रिहायशी इलाकों में संचालित उद्योगों के बारे में कोई आंकड़ा हमारे पास नहीं है। ऐसे किसी उद्योग को हम एनओसी नहीं देते हैं, जो किसी भी तरह का प्रदूषण फैलाता हो। जो भी उद्योग रिहायशी इलाके में प्रदूषण फैला रहे हैं, वे काफी पुराने हैं। शिकायत मिलने पर हम कार्रवाई भी करते हैं। इनकी संख्या कितनी है, इसकी भी हमें जानकारी नहीं है।
- एसआर मौर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
जींस की फैक्ट्री से निकलता केमिकल युक्त पानी- फोटो : SAHARANPUR